मुख्यमंत्री ने इस निर्णय की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए कहा कि इस व्यवस्था से मंत्रियों और जिला प्रशासन के बीच सीधा समन्वय स्थापित होगा। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और विकास कार्यों की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान भी समय पर संभव हो सकेगा।
‘गार्जियन डिस्ट्रिक्ट’ व्यवस्था के तहत प्रत्येक मंत्री को एक या एक से अधिक जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। इन मंत्रियों का काम अपने निर्धारित जिलों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना, स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाना और विकास कार्यों की प्रगति सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा, वे क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक चुनौतियों पर भी नजर रखेंगे और राज्य सरकार को नियमित रूप से फीडबैक देंगे।
इस नई व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार का कहना है कि इससे जिलों में सरकारी नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद मिलेगी और विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी को कम किया जा सकेगा। मंत्री अब केवल नीति निर्माण तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
सरकार ने इस निर्णय के साथ ही कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में भी वृद्धि की घोषणा की है। इसे मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जो तुरंत प्रभाव से लागू होगा। इस फैसले से राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, विधायकों के स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLALAD) में भी वृद्धि की गई है। वर्ष 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये प्रति विधायक किया गया है, जबकि आगामी वर्षों में इसे और बढ़ाने की योजना है। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर विकास परियोजनाओं को और अधिक मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम असम में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग है, जो आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकता है। हालांकि, इसके प्रभाव को लेकर वास्तविक स्थिति जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट होगी।