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कूनो से निकलकर मुरैना के गांव तक पहुंचा चीता, बकरियों के शिकार की आशंका से ग्रामीणों में बढ़ी चिं

 मध्य प्रदेश  कूनो के कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलकर एक चीते के मुरैना जिले के पहाड़गढ़ क्षेत्र स्थित जादेरू गांव के आसपास पहुंचने की सूचना ने स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। गांव और आसपास के इलाकों में चीते की मौजूदगी की खबर फैलते ही लोगों में सतर्कता बढ़ गई है। वन विभाग ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए विशेष निगरानी अभियान शुरू कर दिया है और ग्रामीणों को आवश्यक सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार चीते को खेतों, झाड़ियों और जंगल से लगे क्षेत्रों में घूमते हुए देखा गया है। ग्रामीणों का दावा है कि इस दौरान उसने गांव की दो बकरियों का शिकार भी किया है। हालांकि वन विभाग ने कहा है कि इन दावों की जांच की जा रही है और तथ्यात्मक पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल से संबंधित सभी साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।

चीते की मौजूदगी की सूचना मिलते ही कूनो नेशनल पार्क की विशेष ट्रैकिंग टीम को क्षेत्र में तैनात कर दिया गया। विशेषज्ञों और वनकर्मियों की यह टीम आधुनिक ट्रैकिंग तकनीकों की सहायता से चीते की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार उसका मूवमेंट रिकॉर्ड किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह सुरक्षित रहे और किसी प्रकार का मानव-वन्यजीव संघर्ष पैदा न हो।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी चीते का पार्क की निर्धारित सीमा से बाहर निकलना असामान्य नहीं माना जाता। जब किसी क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या बढ़ती है तो वे नए इलाकों की तलाश में लंबी दूरी तय कर सकते हैं। ऐसे कई मामलों में जानवर कुछ समय तक बाहरी क्षेत्रों में घूमने के बाद पुनः अपने मूल आवास की ओर लौट जाते हैं। इसी कारण वन विभाग स्थिति को प्राकृतिक व्यवहार के रूप में देख रहा है, हालांकि सुरक्षा के लिहाज से पूरी सतर्कता बरती जा रही है।

घटना के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों के लिए विशेष सलाह जारी की है। लोगों से कहा गया है कि वे किसी भी स्थिति में चीते के नजदीक जाने या उसकी तस्वीर लेने के लिए पीछा करने का प्रयास न करें। बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बचने और सुबह-शाम के समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पशुपालकों को अपने मवेशियों और पालतू जानवरों को सुरक्षित स्थानों पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में पालतू पशुओं के शिकार की पुष्टि होती है तो प्रभावित पशुपालकों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की है।

क्षेत्र में वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और गांवों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन का प्रयास है कि चीते की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय निवासियों की सुरक्षा भी पूरी तरह सुनिश्चित की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जागरूकता, सतर्कता और वैज्ञानिक प्रबंधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

फिलहाल चीते की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और वन विभाग स्थिति को नियंत्रित एवं सामान्य बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है। ग्रामीणों से सहयोग की अपील की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को प्रभावी बनाया जा सके।

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