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मोहम्मद रफी के एक एवरग्रीन गाने ने पलट दी थी हिंदी सिनेमा की बाजी, धर्मेंद्र को मिला नया मुकाम तो फीका पड़ा राजेश खन्ना का जादू

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में संगीतकारों, गायकों और अभिनेताओं के बीच की आपसी केमिस्ट्री ने कई बड़े सितारों के करियर की दिशा तय की है। सत्तर के दशक की शुरुआत में जब बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना बैक टू बैक 15 ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर सफलता के शिखर पर थे, तब उनकी फिल्मों में पार्श्वगायन के लिए किशोर कुमार पहली पसंद बन चुके थे। अधिकांश बड़े संगीत निर्देशकों द्वारा किशोर दा को प्राथमिकता दिए जाने के कारण, उस दौर के दिग्गज गायक मोहम्मद रफी का करियर कुछ समय के लिए डगमगाने लगा था। लेकिन साल 1973 में आई एक फिल्म और उसके एक सदाबहार गीत ने फिल्म इंडस्ट्री के पूरे परिदृश्य को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया।

यह ऐतिहासिक बदलाव अभिनेता धर्मेंद्र की मुख्य भूमिका वाली फिल्म लोफर के माध्यम से देखने को मिला था। इस फिल्म में संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के निर्देशन में मोहम्मद रफी ने आज मौसम बड़ा बेईमान है गीत को अपनी जादुई आवाज दी थी। धर्मेंद्र और अभिनेत्री मुमताज पर फिल्माया गया यह रोमांटिक गीत रिलीज होते ही देश भर में एक बड़ा कल्ट क्लासिक साबित हुआ। इस एकल गीत की लोकप्रियता ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और यह उस दौर से लेकर आज तक भारतीय सिनेमा के सबसे पसंदीदा सदाबहार रोमांटिक गानों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।

इस गाने की अभूतपूर्व सफलता ने मोहम्मद रफी के करियर को एक नई और बेहद मजबूत संजीवनी प्रदान करने का काम किया। इस जबरदस्त वापसी के बाद फिल्म जगत के तमाम दिग्गज संगीतकारों ने एक बार फिर रफी साहब की तरफ रुख करना शुरू कर दिया और उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए साइन किया जाने लगा। वहीं दूसरी ओर, इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने अभिनेता धर्मेंद्र के पैर भी इंडस्ट्री में मजबूती से जमा दिए। लोफर की सफलता के बाद धर्मेंद्र को बड़े बैनर्स की फिल्मों के ढेरों ऑफर्स मिलने लगे, जिससे हिंदी सिनेमा में एक्शन और रोमांस का एक नया दौर शुरू हुआ।

इस संगीत सफर में आए बदलाव का सीधा असर तत्कालीन सुपरस्टार राजेश खन्ना के करियर पर भी देखने को मिला। इसी कालखंड के दौरान फिल्म इंडस्ट्री का झुकाव राजेश खन्ना के रोमांटिक अंदाज से हटकर धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की एंग्री यंग मैन और एक्शन इमेज की तरफ बढ़ने लगा था। साल 1975 में रिलीज हुई निर्देशक रमेश सिप्पी की ऐतिहासिक फिल्म शोले ने इस बदलाव पर अंतिम मुहर लगा दी थी। शोले में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने जो इतिहास रचा, उसने राजेश खन्ना के स्टारडम के दौर को काफी पीछे धकेल दिया और उनके करियर का ग्राफ तेजी से नीचे आने लगा।

सिनेमाई विश्लेषकों के अनुसार, लोफर फिल्म का वह एक गाना महज एक हिट ट्रैक नहीं था, बल्कि वह बॉलीवुड में दो बड़े युगों के बीच का टर्निंग पॉइंट था। उसने जहां एक तरफ भारतीय संगीत के सबसे सुरीले गायक मोहम्मद रफी को उनका खोया हुआ सिंहासन वापस दिलाया, वहीं दूसरी तरफ धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों के लिए आगे का रास्ता साफ किया। यही कारण है कि आज भी जब हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली गानों और गानों से बदलने वाली स्टार्स की किस्मत का जिक्र होता है, तो मोहम्मद रफी और धर्मेंद्र के इस जुगलबंदी को सबसे पहले याद किया जाता है।

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