Mahakaushal Times

मिशन 2047 के नाम पर देशविरोधी साजिश ATS जांच में चौंकाने वाले खुलासे ब्रेनवॉश से टारगेट नेटवर्क तक का दावा


मध्यप्रदेश । भोपाल में आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी ATS द्वारा की जा रही जांच में कथित आतंकी मॉड्यूल से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं। एजेंसी की हिरासत में मौजूद आरोपियों से पूछताछ के दौरान ऐसे इनपुट मिले हैं जिनके आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और सामने आई जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार आरोपी इजहार उल हक से पूछताछ में एक कथित नेटवर्क और उसके उद्देश्यों को लेकर कई दावे सामने आए हैं। पूछताछ में आरोपी ने कथित रूप से बताया कि कुछ लोग एक विशेष एजेंडे के तहत काम कर रहे थे और सोशल मीडिया तथा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। एजेंसियां इन दावों की गहन जांच कर रही हैं।

ATS के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क में थे। टेलीग्राम और वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप्लिकेशन का उपयोग कथित तौर पर संवाद और विचारों के आदान प्रदान के लिए किया जा रहा था। एजेंसी अब इन डिजिटल संपर्कों और चैट रिकॉर्ड की तकनीकी जांच कर रही है ताकि नेटवर्क की वास्तविक संरचना और उसके विस्तार का पता लगाया जा सके।

पूछताछ में आरोपी फराज से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक फराज पिछले कई वर्षों से कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसकी पहचान कुछ ऐसे लोगों से कराई गई थी जो विदेश में बैठे कथित हैंडलर्स से जुड़े बताए जा रहे हैं। एजेंसी अब इन संपर्कों की प्रामाणिकता और उनके संभावित प्रभाव की जांच कर रही है।

जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर वैचारिक प्रभाव डालकर लोगों को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। इसी कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

सूत्रों के अनुसार कुछ आरोपियों ने विभिन्न राज्यों के लोगों के संपर्क में होने की बात भी स्वीकार की है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क किन क्षेत्रों तक सक्रिय था और इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

ATS अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है और सभी तथ्यों की पुष्टि की जा रही है। एजेंसी यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किया जाएगा। इसी कारण जांच से जुड़ी जानकारियों को सावधानीपूर्वक परखा जा रहा है।

इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल माध्यमों के जरिए फैलाए जाने वाले कट्टरपंथी विचारों और संदिग्ध नेटवर्क की चुनौती को सामने ला दिया है। जांच एजेंसियां लगातार ऐसे तत्वों पर नजर बनाए हुए हैं और यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही हैं कि किसी भी प्रकार की अवैध या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

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