आम जनता की सेहत पर एनालॉग पनीर का असर: होटल-रेस्टोरेंट में सस्ते विकल्प के इस्तेमाल से जुड़ी ग्राउंड रियलिटी और जरूरी सावधानियां
मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगने के बाद यह जानना जरूरी है कि सस्ते विकल्प के रूप में इसका इस्तेमाल होटल और रेस्टोरेंट में कैसे होता है। आम जनता की सेहत पर इसके संभावित खतरे को देखते हुए उपभोक्ताओं को खरीदारी के दौरान लेबल और सामग्री की जांच करने की सलाह दी गई है।
मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर के उत्पादन , बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगने के बाद से ये सवाल आम इंसान की सेहत के लिहाज से काफी बड़ा बन गया है कि आखिर ये बाजार में मिलता हुआ “विकल्प” लोग की थाली तक कैसे पहुंचता है. महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश में भी इसे रोकने के पीछे मुख्य वजह बताई जा रही है कि आम उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर चिंता है और साथ में एक किस्म का धोखा भी. जमीनी हकीकत ये है कि असली डेयरी पनीर और एनालॉग पनीर के दामों में बहुत बड़ा अंतर होता है, और ये फर्क सीधे आम जनता की सेहत और खान-पान दोनों को प्रभावित कर देता है .
कम कीमत का खेल, और होटल-रेस्तरां में बढ़ता चलन
आमतौर पर शुद्ध दूध से बना डेयरी पनीर 350 से 450 रुपए प्रति किलो या उससे भी ऊपर दाम में मिल जाता है, जबकि एनालॉग पनीर को करीब 150 से 250 रुपए प्रति किलो तक उपलब्ध होने का दावा किया जाता है . इसी भारी कीमत के फर्क की वजह से होटल, रेस्तरां, और कैटरिंग जैसे कारोबारों में सस्ते विकल्प के चक्कर में इसके इस्तेमाल की संभावना बढ़ जाती है . भले ही एनालॉग पनीर को पारंपरिक दूध से बने पनीर के विकल्प के रूप में तैयार किया जाता है, जिसमें दूध के साथ या उसकी जगह पाम ऑयल, वनस्पति वसा, स्टार्च और दूसरी सामग्री मिलाई जा सकती है, लेकिन इसे असली डेयरी पनीर का नाम देकर बेचना उपभोक्ता को साफ-साफ उलझा देता है.
स्वास्थ्य पर असर, और घटिया तेलों का जोखिम
एनालॉग पनीर को लेकर स्वास्थ्य वाली आशंका सिर्फ इसके “विकल्प” होने तक सीमित नहीं है. असली खतरा तब बढ़ता है जब इसमें बेहद खराब गुणवत्ता वाले तेल, बहुत ज्यादा हाइड्रोजेनेटेड वनस्पति तेल या फिर खाद्य मानकों के खिलाफ सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है . ऐसे घटिया उत्पाद जब खान-पान में शामिल होते हैं, तो आम लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. सरकार की तरफ से प्रतिबंध और कार्रवाई के फैसलों के बाद अब ये खास जरूरत बन गई है कि बाजार में बिक रहे ऐसे सामानों की जांच पड़ताल सघन हो, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और बेहतर क्वालिटी वाला खाद्य मिल सके.
खरीदते समय आम आदमी को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
आम जनता को ये समझना जरूरी है कि हर एनालॉग पनीर को एक ही तरह से खतरनाक मानना सही नहीं, लेकिन इसकी पहचान और लेबलिंग बिल्कुल अहम है . खरीदारी करते वक्त पैकेट पर दी गई सामग्री की सूची यानी Ingredients को ध्यान से पढ़ना चाहिए. अगर पैकेट पर FSSAI लाइसेंस के साथ-साथ Analogue, Imitation या Vegetable Fat जैसी बातें लिखी हों, तो उसे पारंपरिक डेयरी पनीर नहीं समझा जाना चाहिए. खुले में या बिना किसी लेबल के पनीर खरीदने से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है, ताकि लोग अपनी और अपने परिवार की सेहत को बेहतर तरीके से बचा सकें.
