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ईडी की बड़ी कार्रवाई, पीएमएलए के तहत टीएमसी के 440 करोड़ रुपये के बैंक फंड पर रोक, वित्तीय लेन-देन की जांच तेज

नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही जांच के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े तीन बैंक खातों में जमा लगभग 440.42 करोड़ रुपये की राशि के लेन-देन पर रोक लगाने की कार्रवाई की है। एजेंसी का कहना है कि यह कदम कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के प्रवाह की जांच के तहत उठाया गया है। समाचार लिखे जाने तक इस कार्रवाई पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई पीएमएलए की धारा 17(1-ए) के तहत की गई है। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान मिले प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर संबंधित बैंक खातों में मौजूद राशि के लेन-देन को फिलहाल प्रतिबंधित किया गया है ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में वित्तीय दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और विभिन्न कंपनियों के बीच हुए लेन-देन की विस्तृत जांच जारी है।

जांच के क्रम में ईडी ने कोलकाता स्थित कई परिसरों पर तलाशी अभियान भी चलाया। इनमें केयरवेल समूह से जुड़े कार्यालय भी शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से लगभग 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे संबंधित एक अन्य कंपनी को स्थानांतरित किए गए। एजेंसी इन लेन-देन की प्रकृति, उद्देश्य और वैधानिक प्रक्रिया की जांच कर रही है।

ईडी के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित कंपनी ने लगभग 82.96 करोड़ रुपये एक नवगठित कंपनी को हस्तांतरित किए। एजेंसी का दावा है कि इस नई कंपनी के खातों में बड़ी मात्रा में धनराशि पहुंची, जिसके उपयोग की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर धन के पूरे प्रवाह को समझने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि जांच के दौरान प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 112 करोड़ रुपये का उपयोग एक बिजनेस जेट और एक हेलीकॉप्टर की खरीद में किया गया। एजेंसी का दावा है कि बाद में इन विमानन परिसंपत्तियों का उपयोग किराये की सेवाओं के माध्यम से किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक स्तर पर अभी पुष्टि होना बाकी है और मामले की जांच जारी है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पीएमएलए के तहत की जाने वाली ऐसी कार्रवाई जांच के प्रारंभिक चरण का हिस्सा होती है और इसका उद्देश्य संदिग्ध वित्तीय संपत्तियों तथा लेन-देन को सुरक्षित रखना होता है। अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होता है। इसलिए किसी भी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायालय के अंतिम निर्णय के आधार पर ही माना जाएगा।

यह मामला एक बार फिर राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता और चुनावी वित्तपोषण से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में ईडी की जांच, संबंधित पक्षों के जवाब और न्यायिक प्रक्रिया इस मामले की आगे की दिशा तय करेंगे। फिलहाल एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और संबंधित संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत जांच में जुटी हुई है, जबकि सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

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