Mahakaushal Times

बंगाल में राजनीतिक हिंसा और घुसपैठ की बड़ी चुनौती


– संजय सिन्हा
पश्चिम बंगाल की नई सरकार के साने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक हिंसा का गहरा कल्चर और घुसपैठ है। अजीब बात है कि एक राज्य जो अपनी बौद्धिक विरासत पर गर्व करता है, वह दशकों से बदले की राजनीति और सड़क पर हिंसा के लिए उपजाऊ ज़मीन रहा है। हालांकि भाजपा का यह स्पष्ट नारा रहा है कि वह विदेशी घुसपैठियों को देश से बाहर करेगी, इसलिए पश्चिम बंगाल के जनादेश में इस पर अब जनता की मुहर भी लग गई है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा देकर अपने शासन का संचालन किया। इसमें बांग्लादेश के घुसपैठियों का समर्थन भी शामिल रहा। अब भाजपा की सरकार बनने के बाद यह तय हो चुका है कि अब यहां की बांग्लादेश से लगी हुई सीमाएं पहले से ज्यादा सुरक्षित होंगी और एक बड़ी समस्या से छुटकारा भी मिलेगा।

इससे यह भी आशय निकलता है कि सबका साथ और सबका विकास वाली राजनीतिक अवधारणा को स्वीकार किया जाने लगा है। देश में इसी प्रकार की राजनीति की आवश्यकता है क्योंकि राजनीतिक दलों ने आज देश में रहने वाले समाज के बीच इतना भेद पैदा कर दिया है कि कई जगह समाज बंधु एक दूसरे के दुश्मन बन गए हैं। हिन्दू और मुसलमान समाज के ही हिस्से हैं, इसलिए इनको अलग अलग देखने की राजनीति नहीं होना चाहिए। इसके विपरीत देश के कुछ राजनीतिक दलों का आधार ही मुस्लिम वोट हैं जबकि यह भी सही है कि तुष्टिकरण से किसी का भला न तो हुआ है और न ही होगा।भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में प्रारंभ से ही इस बात पर जोर दिया था कि वह विदेशी घुसपैठियों के खिलाफ है। भाजपा के नेताओं के भाषण भी इसी पर केंद्रित रहते थे। इस मुद्दे पर भाजपा को जनता का भी समर्थन मिला और जनता ने भाजपा को बहुमत दे दिया। इसके अलावा ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने जो कार्य किए, वह कहीं न कहीं हिन्दू समाज को नीचा दिखाने वाले ही थे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के नेता शायद इस बात को भूल गए कि बहुसंख्यक समाज को नकारने की राजनीति एक प्रकार से उसके लिए सत्ता से अलग होने की तस्वीर पेश कर सकती है।

बंगाल घुसपैठ की समस्या से बहुत प्रभावित हुआ है। यहां पर अप्रत्याशित रूप से ज़मीनों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। कई जगह अचानक ही मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र बनते जा रहे हैं जिनमें मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर और मालदा आदि है। यह तीनों जिले बांग्लादेश की सीमा से लगे हुए हैं। इसके चलते बंगाल में अपराध भी बहुत होने लगे हैं। इसका कारण यही माना जा रहा है कि जो व्यक्ति घुसपैठ करके आए हैं, उनके सामने रोजगार का संकट है। जब रोजगार नहीं मिलेगा तो स्वाभाविक रूप से व्यक्ति गलत कार्य भी करने लगता है। इससे की दशा और दिशा भी ख़राब हो रही है।

मुर्शिदाबाद के रास्ते कई बांग्लादेशी नागरिक घुसपैठ करते रहे हैं। स्थानीय नागरिकों की मदद से वे सभी अपने आशियाने भी बना रहे थे, इनके ज्यादातर आशियाने अवैध कब्ज़ा करके ही बने हैं। तृणमूल कांग्रेस की सरकार के समय इनको पर्याप्त संरक्षण भी मिला। उल्लेखनीय है जिन क्षेत्रों में मुस्लिमों की जनसंख्या अचानक बढ़ी है, वे सभी तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्र रहे हैं। इन क्षेत्रों में हिन्दू समाज का कोई भी व्यक्ति जाने से डरता है। सवाल यह है कि यह डर किसने पैदा किया और इसको संरक्षण देने वाले कौन हैं। तृणमूल कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राह पर चलते हुए इनको ताकत देने का काम किया। और यही उसकी हार का कारण भी बना। अब बंगाल का राजनीतिक दृश्य परिवर्तित हो चुका है। जिन्होंने लम्बे समय तक अमानुषिक अत्याचार सहन किए, वे सत्ता में आ चुके हैं लेकिन भाजपा को यह सत्ता ऐसे ही नही मिल गई। उसके सैकड़ों कार्यकर्ता का बलिदान इस जीत के नींव के पत्थर बने। चुनाव के बाद शुभेन्दु अधिकारी के निजी सहायक देवनाथ की हत्या इसका ताजा उदाहरण है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह कार्य प्रशिक्षित अपराधियों ने किया। संभावना इस बात की भी है कि घटना के बाद ये बांग्लादेश भाग चुके हैं। इसे राजनीतिक हत्या के तौर पर भी देखा जा रहा है और इसके आरोप तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर लग रहे हैं।

घुसपैठियों की समस्या से त्रस्त पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद विदेशी घुसपैठिओं के चेहरे उतरने लगे हैं, क्योंकि अब इन विदेशी घुसपैठियों को सहन नहीं किया जाएगा। अब उनको बाहर जाना ही होगा। भाजपा की सरकार ही इनको बाहर निकलेगी। देश के गृह मंत्री अमित शाह इसकी चेतावनी पहले से ही देते रहे हैं। यहां यह कहना भी उचित होगा कि भाजपा ने केवल घुसपैठियों को बाहर निकालने की ही बात की है, भारत के मुसलमानों की नहीं लेकिन विपक्ष और खासकर तृणमूल कांग्रेस ने ऐसा भ्रम फैलाने का प्रयास किया कि सारे मुस्लिमों पर इसका प्रभाव होगा। विदेशी घुसपैठियों को बाहर निकालना सभी चाहते हैं. विपक्ष को इस मुद्दे पर भाजपा का साथ देना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय हित की बात है।

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