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UN सुरक्षा परिषद चुनाव में बड़ा बदलाव: पाकिस्तान की विदाई तय, पहली बार किर्गिस्तान को मिली UNSC में जगह

नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों के लिए हुए चुनाव में इस बार महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े सबसे प्रभावशाली मंचों में से एक माने जाने वाले सुरक्षा परिषद में कई नए देशों की एंट्री हुई है, जबकि कुछ मौजूदा सदस्य अपने कार्यकाल की समाप्ति के साथ परिषद से बाहर हो जाएंगे। इस चुनाव का सबसे चर्चित परिणाम किर्गिस्तान की ऐतिहासिक जीत रही, जिसने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में जगह बनाई है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान के बाद किर्गिस्तान को दो वर्षीय कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद का सदस्य चुना गया। इसके साथ ही देश ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सुरक्षा परिषद में उसकी मौजूदगी को मध्य एशियाई क्षेत्र के बढ़ते महत्व और वैश्विक मंच पर उसकी सक्रिय भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।

इस चुनाव के परिणामों के बाद पाकिस्तान का कार्यकाल समाप्त होने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। पाकिस्तान वर्तमान में सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों में शामिल है, लेकिन उसका कार्यकाल वर्ष 2026 के अंत में समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही परिषद में उसकी जगह नए सदस्य देश अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। पाकिस्तान के अलावा पनामा, डेनमार्क, ग्रीस और सोमालिया भी अपना कार्यकाल पूरा कर परिषद से बाहर हो जाएंगे।

चुनाव प्रक्रिया के दौरान पांच सीटों के लिए सात देशों के बीच मुकाबला हुआ। संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार किसी भी उम्मीदवार देश को जीत के लिए महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य देशों के कम से कम दो-तिहाई मत प्राप्त करना आवश्यक होता है। मतदान के पहले दौर में ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा जिम्बाब्वे को पर्याप्त समर्थन मिल गया और वे सीधे निर्वाचित हो गए। शेष सीट के लिए कई दौर की वोटिंग हुई, जिसके बाद किर्गिस्तान ने फिलीपींस को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की।

नवनिर्वाचित देशों का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा और 31 दिसंबर 2028 तक जारी रहेगा। इस दौरान ये देश वैश्विक सुरक्षा, संघर्ष समाधान, शांति स्थापना अभियानों और अंतरराष्ट्रीय संकटों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। सुरक्षा परिषद में उनकी भूमिका न केवल क्षेत्रीय हितों का प्रतिनिधित्व करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी योगदान देगी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कुल 15 सदस्य देशों से मिलकर बनी है। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन स्थायी सदस्य हैं, जिन्हें वीटो शक्ति प्राप्त है। इनके अलावा दस गैर-स्थायी सदस्य होते हैं, जिनका चुनाव क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर किया जाता है। हर वर्ष पांच सीटों पर नए सदस्यों का चयन होता है, जिससे परिषद में विभिन्न क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

सुरक्षा परिषद को संयुक्त राष्ट्र की सबसे प्रभावशाली संस्था माना जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में बाध्यकारी निर्णय लेने, आर्थिक प्रतिबंध लगाने और आवश्यकता पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने की शक्ति रखती है। ऐसे में परिषद की सदस्यता किसी भी देश के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीतिक उपस्थिति मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। किर्गिस्तान की ऐतिहासिक जीत और नए सदस्य देशों की एंट्री को इसी संदर्भ में वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

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