फ्लोर टेस्ट के दौरान जब 25 AIADMK विधायकों ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK के पक्ष में क्रॉस वोट किया, तो राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद सत्ता समीकरण बदलते नजर आए और TVK की स्थिति मजबूत होती दिखाई दी। पार्टी नेतृत्व ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।
एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने सख्त रुख अपनाते हुए षणमुगम और वेलुमणि को उनके पदों से हटा दिया। इसके साथ ही उन्होंने दलबदल विरोधी कानून के तहत संबंधित विधायकों को अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पार्टी का दावा है कि बागी विधायकों ने व्हिप का उल्लंघन किया है, जबकि दूसरी ओर बागी गुट इसे अवैध और असंवैधानिक बता रहा है।
षणमुगम गुट ने पलटवार करते हुए कहा है कि पार्टी महासचिव को सीधे व्हिप नियुक्त करने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, विधायकों की बैठक में ही नेता और व्हिप का चुनाव किया जाता है, इसलिए वर्तमान व्हिप नियुक्ति कानूनी रूप से मान्य नहीं है। इस विवाद ने पार्टी के भीतर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई को और तेज कर दिया है, जिससे संकट गहरा गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चेन्नई में तनाव का माहौल बन गया है। AIADMK मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी संभावित टकराव या हिंसा को रोका जा सके। 2022 में हुई हिंसक झड़पों की यादें अभी भी ताजा हैं, जब पार्टी के दो गुटों के बीच परिसर में तोड़फोड़ और मारपीट जैसी घटनाएं हुई थीं। प्रशासन इस बार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
पार्टी के भीतर चल रही इस खींचतान ने संगठनात्मक एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पलानीस्वामी गुट अब आगे की रणनीति तय करने के लिए वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की तैयारी में है, वहीं बागी गुट ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे पार्टी मुख्यालय से दूरी बनाए रखेंगे।
इस राजनीतिक उथल-पुथल का असर केवल AIADMK तक सीमित नहीं है, बल्कि तमिलनाडु की पूरी राजनीति पर पड़ सकता है। सत्ता समीकरण बदलने की संभावना ने अन्य दलों की रणनीति भी प्रभावित कर दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पार्टी इस संकट से उबर पाती है या यह विभाजन स्थायी रूप ले लेता है।