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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, किसी भी पात्र मतदाता को वोट से वंचित नहीं किया जाएगा..


नई दिल्ली:   पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और निर्णायक आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित नहीं रहेगा और यदि मतदान से ठीक अंतिम समय तक भी किसी व्यक्ति को कानूनी रूप से राहत मिलती है तो उसे वोट डालने का पूरा अधिकार होगा। इस निर्णय को चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदान केवल एक संवैधानिक अधिकार नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अधिकार भी है। अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि अपीलीय निर्णयों के आधार पर तुरंत एक पूरक संशोधित मतदाता सूची तैयार की जाए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम मतदान के समय तक सूची में शामिल किया जा सके और उसे मतदान का अवसर मिल सके।

अदालत ने व्यवस्था दी है कि जिन मामलों में अपील पर ट्रिब्यूनल मतदान से दो दिन पहले तक निर्णय देता है, उन सभी मतदाताओं के नाम संशोधित सूची में जोड़े जाएंगे। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि अपीलीय प्रक्रिया का दुरुपयोग कर चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए, जिससे चुनाव की समयबद्धता और सुचारु संचालन प्रभावित हो।

सुप्रीम कोर्ट ने मतदान की तिथियों के अनुसार स्पष्ट समय सीमा भी निर्धारित की है। पहले चरण के मतदान के लिए यह निर्देश दिया गया है कि जिन अपीलों पर समय रहते निर्णय हो जाता है, उनके नाम निर्धारित समय सीमा के भीतर अंतिम सूची में शामिल किए जाएं। इसी तरह दूसरे चरण के मतदान के लिए भी अपीलीय निर्णयों को आधार बनाकर संशोधित सूची जारी करने का आदेश दिया गया है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता को मतदान से वंचित न रहना पड़े।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि ट्रिब्यूनल के निर्णय के तुरंत बाद मतदाता सूची संबंधित अधिकारियों और संबंधित पक्षों तक पहुंचाई जाए, जिससे मतदान के दिन किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य चुनावी प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और न्यायसंगत बनाना बताया गया है।

यह पूरा मामला राज्य में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में अपीलें लंबित थीं। कम समय में इन सभी मामलों का निपटारा करना एक बड़ी चुनौती बन गया था। इसी पृष्ठभूमि में अदालत ने अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया कि किसी भी पात्र नागरिक का अधिकार प्रभावित न हो।

इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मतदाता अधिकारों को 

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