4 मई को शुरू हुआ था अमेरिकी ऑपरेशन
अमेरिका ने 4 मई को होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित करने के लिए “प्रोजेक्ट फ्रीडम” लॉन्च किया था। लेकिन महज एक दिन के भीतर ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे रोकने का आदेश दे दिया।ट्रम्प ने दावा किया था कि पाकिस्तान के अनुरोध पर यह ऑपरेशन रोका गया, लेकिन अब सामने आई रिपोर्ट्स में सऊदी अरब की नाराजगी को बड़ा कारण बताया जा रहा है।
सऊदी के इनकार से बिगड़ा समीकरण
एक न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व ने इस मिशन में शामिल अमेरिकी विमानों को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मंजूरी नहीं दी। इससे पूरा ऑपरेशन प्रभावित हुआ।
सूत्रों का कहना है कि ट्रम्प द्वारा बिना पूर्ण कूटनीतिक तैयारी के सोशल मीडिया पर इस मिशन की घोषणा करने से खाड़ी देशों में असहजता पैदा हो गई। इसके बाद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत भी हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई।
सीमित सफलता के बाद ऑपरेशन बंद
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका इस अभियान के तहत सिर्फ दो दिनों में तीन जहाजों को ही सुरक्षित पार करा सका, जिसके बाद ऑपरेशन रोकना पड़ा।
ईरान-अमेरिका वार्ता और तनाव
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच 14 सूत्रीय समझौते पर बातचीत आगे बढ़ी है, हालांकि अभी कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है।
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में होर्मुज मार्ग खोलने का प्रस्ताव भी रखा है, जिसका ईरान ने विरोध किया है।
क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल
चीन और ईरान के बीच बीजिंग में उच्च स्तरीय बैठक हुई
चीन ने युद्ध रोकने की अपील करते हुए ईरान को समर्थन का भरोसा दिया
अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश में जुटे हैं
ट्रम्प का दावा और सख्त रुख
राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो और बड़े हमले किए जा सकते हैं।
होर्मुज में हमला, स्थिति और तनावपूर्ण
फ्रांसीसी शिपिंग कंपनी CMA CGM ने बताया कि उनके एक कार्गो जहाज पर मिसाइल या ड्रोन हमला हुआ, जिसमें कई क्रू सदस्य घायल हुए हैं। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।होर्मुज स्ट्रेट में चल रहा यह विवाद अब सिर्फ सैन्य या कूटनीतिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि अमेरिका, सऊदी अरब, ईरान और चीन जैसे बड़े खिलाड़ियों के बीच रणनीतिक टकराव में बदलता जा रहा है।