अदालत का अहम फैसला
वर्जीनिया स्थित अमेरिकी संघीय अदालत के जज माइकल एस. नाचमैनॉफ ने 16 अप्रैल को दिए आदेश में टेलिस के खिलाफ मामला खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने गलत कानूनी प्रावधान के तहत आरोप लगाए थे, इसलिए मामला आगे नहीं चल सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह खारिजी “बिना पूर्वाग्रह” (without prejudice) की गई है, यानी कानूनी प्रक्रिया के आधार पर भविष्य में अलग धारा के तहत मामला फिर से दायर किया जा सकता है।
क्या था पूरा मामला?
एशले जे. टेलिस अमेरिका की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति के प्रमुख विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन पर आरोप था कि उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग और रक्षा तंत्र से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज अपने निजी आवास में रखे थे।
अभियोजन पक्ष का दावा था कि टेलिस के पास लगभग 11 संवेदनशील फाइलें थीं, जिनमें हजारों पन्नों की जानकारी शामिल थी। इनमें से कुछ दस्तावेजों को टॉप सीक्रेट श्रेणी में रखा गया था, और कुछ चीन की सैन्य व परमाणु क्षमताओं से संबंधित बताए गए थे।
बचाव पक्ष की दलील
टेलिस की कानूनी टीम ने अदालत में कहा कि सरकार ने जासूसी अधिनियम (Espionage Act) की गलत धारा 793(e) के तहत मामला दर्ज किया।
वकीलों का तर्क था कि यह धारा उन मामलों में लागू होती है जहां दस्तावेज अवैध रूप से रखे गए हों, जबकि टेलिस के पास उच्च स्तरीय सुरक्षा मंजूरी (security clearance) थी और उन्हें यह दस्तावेज आधिकारिक रूप से सौंपे गए थे।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सरकार ने यह साबित नहीं किया कि टेलिस ने दस्तावेज चोरी किए या अनधिकृत तरीके से हासिल किए, बल्कि वे उनके आधिकारिक कार्यक्षेत्र का हिस्सा थे।
सरकार की दलील और चिंता
अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि टेलिस के पास अत्यंत संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेजों तक पहुंच थी और उन्होंने इन्हें अपने निजी घर में रखा, जो सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है।
सरकार ने यह भी कहा था कि टेलिस के पास हजारों पन्नों की गोपनीय जानकारी थी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता था। इसी आधार पर उनकी जमानत का भी विरोध किया गया था।
अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने गलत कानूनी आधार चुना, इसलिए मौजूदा आरोप टिक नहीं पाए। इसके बाद अदालत ने मामला खारिज कर दिया और टेलिस ने अपनी जमानत राशि वापस करने की मांग भी रखी, जिस पर सरकार ने आपत्ति नहीं जताई।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला अमेरिका में गोपनीय दस्तावेजों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बढ़ते विवादों की पृष्ठभूमि में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। हाल के वर्षों में अमेरिका में कई पूर्व और वर्तमान अधिकारियों पर संवेदनशील दस्तावेजों के गलत उपयोग के आरोप लगे हैं।एशले जे. टेलिस लंबे समय से अमेरिकी सरकार के रणनीतिक सलाहकार रहे हैं और इंडो-पैसिफिक नीति व भारत-अमेरिका संबंधों पर उनकी विशेषज्ञता को महत्वपूर्ण माना जाता है।