यह योजना वित्त अधिनियम 2026 में किए गए संशोधनों के बाद लागू की गई है। नए प्रावधानों के अनुसार अब केवल उन्हीं भविष्य निधि ट्रस्टों को आयकर कानून के तहत मान्यता मिलेगी, जिन्हें कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत विधिवत छूट प्राप्त होगी। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए EPFO ने यह विशेष योजना शुरू की है ताकि पात्र संस्थान समय रहते अपनी स्थिति को पूरी तरह कानूनी रूप से नियमित कर सकें।
योजना का लाभ उन संस्थानों को मिलेगा, जो आयकर अधिनियम 1961 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त पीएफ ट्रस्ट का संचालन कर रहे हैं, लेकिन उनके पास केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी औपचारिक छूट आदेश नहीं है। यह योजना 29 जून 2026 से प्रभावी है और इसकी अवधि छह महीने निर्धारित की गई है। इस दौरान आवेदन करने वाले पात्र संस्थानों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का अवसर मिलेगा।
EPFO ने योजना के लिए पात्र संस्थानों को दो श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली श्रेणी में वे संस्थान शामिल हैं जो अपने ट्रस्ट का पूर्व प्रभाव से नियमितीकरण कराना चाहते हैं और वर्तमान में बिना औपचारिक छूट के नियमों का पालन कर रहे हैं या आगे भी उसी व्यवस्था में काम करना चाहते हैं। दूसरी श्रेणी में वे संस्थान हैं जो अपने ट्रस्ट का नियमितीकरण कराने के साथ भविष्य में भी सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत छूट प्राप्त संस्थान के रूप में कार्य जारी रखना चाहते हैं।
इस योजना के तहत पात्र ट्रस्टों को उनके गठन की तारीख से निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक पूर्व प्रभाव से छूट और मान्यता प्रदान की जा सकती है। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के कुछ प्रावधानों में भी विशेष राहत दी गई है। इनमें न्यूनतम कर्मचारियों की संख्या, ट्रस्ट फंड की न्यूनतम सीमा तथा तीन वर्ष के पूर्व अनुपालन जैसी शर्तों में छूट शामिल है। इससे अनेक संस्थानों के लिए नियामकीय प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी।
यदि किसी ट्रस्ट ने अपने कर्मचारियों के खातों में कानून के अनुरूप या उससे अधिक अंशदान और ब्याज जमा किया है, तो उससे संबंधित बकाया राशि, हर्जाना और ब्याज के लंबित मामलों को वापस लेने पर भी विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही पहले जारी किए गए कुछ आदेशों को भी शून्य माना जा सकता है, जिससे पात्र संस्थानों को अतिरिक्त राहत मिलने की संभावना है।
योजना का लाभ लेने के इच्छुक संस्थानों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन संबंधित EPFO क्षेत्रीय कार्यालय को ईमेल के माध्यम से भेजना होगा। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और वित्तीय अभिलेख प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। संस्थानों को अपने खातों का ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट से कराना होगा। यदि EPFO किसी विशेष या अनुपालन ऑडिट का निर्देश देता है, तो आवेदन जमा होने के तीन महीने के भीतर उसे पूरा करना आवश्यक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना पात्र पीएफ ट्रस्टों के लिए अपने रिकॉर्ड नियमित करने, कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने और भविष्य में नियामकीय जटिलताओं से बचने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।