पुलिस की शुरुआती जांच और पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, हीरा सिंह लंबे समय से पूरे मध्य प्रदेश में फर्जी मेडिकल डिग्रियों का नेटवर्क चला रहा था। वह मोटी रकम लेकर लोगों को नकली डिग्रियां उपलब्ध कराता था, जिनके आधार पर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नियुक्तियां कराई जाती थीं। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और नियुक्ति प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने 12 से अधिक ऐसे लोगों के नाम कबूल किए हैं, जिन्होंने उससे फर्जी डिग्रियां खरीदी थीं और डॉक्टर के रूप में काम कर रहे थे। पुलिस अब इन सभी की तलाश में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लगातार छापेमारी कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या स्थानीय स्तर पर भी बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्रियां बांटी गई थीं।
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। बिलकिसगंज CHC के प्रभारी डॉ. नीरज कुमार डागोर ने बताया कि आरोपी हीरा सिंह संस्थान में रेडियोग्राफर के पद पर पदस्थ था और उसने एक तारीख से छुट्टी का आवेदन दिया हुआ था। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली है और अभी तक विभाग को इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग की साख पर लगे इस दाग ने प्रदेश में सरकारी नियुक्तियों और मेडिकल प्रमाणपत्रों की सत्यता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।