जानकारी के अनुसार गिरोह बेरोजगार युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। आरोप है कि युवाओं से दो लाख से पांच लाख रुपये तक की रकम वसूली जाती थी और बदले में उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए जाते थे। इन नियुक्ति पत्रों में एम्स, वन विभाग, रेलवे, बैंक और नगर निगम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में नियुक्ति दर्शाई जाती थी। कई युवाओं को तो भारतीय वन सेवा अधिकारी, बैंक क्लर्क और रेलवे कर्मचारी तक नियुक्त किए जाने का दावा किया गया।
मामले को और गंभीर बनाता है फर्जी दस्तावेजों का स्वरूप। जांच में ऐसे नियुक्ति पत्र सामने आए हैं जिनमें लोक निर्माण विभाग से संबंधित भर्ती दिखाते हुए मंत्री के कथित फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। आरोप है कि जालसाजों ने दस्तावेजों को इतना वास्तविक बनाने की कोशिश की कि पीड़ितों को किसी प्रकार का संदेह न हो। यही वजह रही कि कई युवा लंबे समय तक खुद को चयनित कर्मचारी मानते रहे और बाद में ठगी का शिकार होने का पता चला।
पीड़ितों के अनुसार गिरोह भरोसा जीतने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। युवाओं को सरकारी कार्यालयों के आसपास बुलाया जाता था ताकि उन्हें लगे कि पूरी प्रक्रिया वैध है। गिरोह के अन्य सदस्य खुद को पहले से चयनित कर्मचारी बताकर विश्वास पैदा करते थे। वे दावा करते थे कि उनकी नियुक्ति भी इसी माध्यम से हुई है, जिससे नए अभ्यर्थी आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे।
जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। प्रमिला तिवारी और उसके सहयोगियों के पास बेरोजगार युवाओं की शैक्षणिक जानकारी और मोबाइल नंबर पहले से उपलब्ध थे। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि युवाओं का व्यक्तिगत डाटा कहीं से अवैध रूप से प्राप्त किया गया था। अब पुलिस इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि आखिर यह संवेदनशील जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची।
टीटी नगर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी नियुक्ति पत्रों, बैंक लेनदेन और आरोपियों के नेटवर्क की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने युवाओं को अब तक ठगी का शिकार बनाया गया है।
यह मामला बेरोजगारी की समस्या का फायदा उठाकर युवाओं के साथ किए जा रहे संगठित अपराध की गंभीर तस्वीर पेश करता है। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सरकारी नौकरी से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें और किसी भी व्यक्ति को नौकरी दिलाने के नाम पर रकम न दें।