सीईटीए बिजनेस यूटिलाइजेशन मैनुअल को एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में तैयार किया गया है। इसमें व्यापार से जुड़े नियमों प्रक्रियाओं और उपलब्ध अवसरों को आसान भाषा में समझाया गया है ताकि छोटे मध्यम और बड़े सभी प्रकार के उद्योग इस समझौते का प्रभावी उपयोग कर सकें। इस पहल से दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस मैनुअल का विमोचन एफआईसीसीआई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में किया गया जिसमें यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल और एचएसबीसी इंडिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों संस्थानों ने संयुक्त रूप से इस दस्तावेज को तैयार किया है। इसे एक लिविंग डॉक्यूमेंट के रूप में विकसित किया गया है जिसका अर्थ है कि समय समय पर बदलती व्यापारिक जरूरतों और नए नियमों के अनुसार इसमें संशोधन और अपडेट किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीईटीए लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच पहले से अधिक आसान होगी। व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और निवेश के नए अवसर सामने आएंगे। इससे निर्यातकों आयातकों और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। यह समझौता भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।
यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के ग्रुप मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ किशोर जयरामन ने कहा कि यह मैनुअल केवल जानकारी देने वाला दस्तावेज नहीं बल्कि कारोबारियों के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप है। इसके माध्यम से कंपनियां व्यापार समझौते के नियमों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगी और उनका लाभ उठाकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगी।
एचएसबीसी इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हितेंद्र दवे ने भी इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के उद्योगों को अधिक भरोसा बेहतर बाजार पहुंच और मजबूत व्यावसायिक साझेदारी का अवसर देगा। उनका मानना है कि कंपनियों को इस मैनुअल का उपयोग करते हुए सीमा पार व्यापार और निवेश को नई दिशा देनी चाहिए।
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार लगातार मजबूत हो रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 की चौथी तिमाही तक दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग अड़तालीस अरब पाउंड के करीब पहुंच चुका है जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को दर्शाता है। ऐसे में सीईटीए और इसके लिए तैयार किया गया यह बिजनेस मैनुअल भविष्य में व्यापार निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।