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मध्य प्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए बड़ा कदम: गांव स्तर तक तैनात होंगे अधिकारी



नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को खत्म करने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब राज्य में गांव स्तर तक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी तैनात किए जाएंगे, जो मौके पर पहुंचकर तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे।

क्या है नई व्यवस्था?
महिला एवं बाल विकास विभाग ने नई व्यवस्था के तहत पूरे राज्य में निगरानी प्रणाली को मजबूत किया है। इसके अनुसार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग अधिकारी नियुक्त होंगे। बाल विवाह की सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचेंगे। जरूरत पड़ने पर विवाह को तुरंत रोकने की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह व्यवस्था बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत लागू की जा रही है।

कौन होंगे जिम्मेदार अधिकारी?
नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है:

ग्रामीण क्षेत्रों में 
राजस्व निरीक्षक

पटवारी

महिला एवं बाल विकास पर्यवेक्षक

शहरी क्षेत्रों में:
नगर निगम के जोनल अधिकारी

राजस्व और स्वास्थ्य अधिकारी

नगरपालिका और नगर परिषद के अधिकारी

इसके अलावा जिला कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और परियोजना अधिकारी पहले से ही इस कानून के तहत कार्रवाई के लिए अधिकृत हैं।

अधिकारियों की शक्तियाँ
नए प्रावधानों के तहत अधिकारी:

बाल विवाह रोकने के लिए तत्काल मौके पर पहुंच सकेंगे

विवाह को अवैध घोषित करने के लिए निषेधाज्ञा (injunction) जारी कर सकेंगे

शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई कर सकेंगे

पुलिस की सहायता से विवाह रुकवा सकेंगे

क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में बाल विवाह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं:

2020 से 2025 के बीच कुल 2,916 मामले दर्ज हुए

वर्ष 2025 में अकेले 538 मामले सामने आए

पिछले कुछ वर्षों में मामलों में लगभग 47% वृद्धि दर्ज की गई

इन आंकड़ों ने सरकार को गांव स्तर तक निगरानी बढ़ाने के लिए मजबूर किया।

उद्देश्य क्या है?
सरकार का मुख्य उद्देश्य है:

बाल विवाह जैसी कुप्रथा को खत्म करना

ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाना

समय पर हस्तक्षेप करके बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना

मध्य प्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए लिया गया यह कदम एक मजबूत प्रशासनिक पहल है। गांव स्तर तक अधिकारियों की तैनाती से उम्मीद है कि अब इस सामाजिक बुराई पर तेजी से रोक लगेगी। यह व्यवस्था न केवल कानून को मजबूत बनाएगी, बल्कि समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ाएगी।

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