वैश्विक संकट के बीच मानवता की अंतिम सुरक्षा-रेखा है ऊर्जा संरक्षण

– योगेश कुमार गोयल आज जब विश्व एक बार फिर भू-राजनीतिक तनावों के दौर से गुजर रहा है और ईरान, अमेरिका तथा इजरायल के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है, तब ऊर्जा केवल विकास का साधन नहीं बल्कि अस्तित्व का प्रश्न बन चुकी है। तेल और गैस के दामों […]
जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता : बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणाम और पारंपरिक भ्रांतियाँ

डॉ. शैलेश शुक्ला भारत आज दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन चुका है। 2024 में भारत की जनसंख्या लगभग 145 करोड़ को पार कर गई है। यह एक ऐसी समस्या है जो देश के विकास, संसाधनों, पर्यावरण और लोगों के जीवन स्तर पर सीधा असर डालती है। एक तरफ जहाँ देश तरक्की की […]
आपदा में अवसर खोजने की मानसिकता: समाज के लिए एक खतरनाक संकेत

– कैलाश चन्द्रमार्च 2026 के दूसरे सप्ताह से भारत में एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति और बुकिंग से जुड़ी चर्चा अचानक सुर्खियों में आ गई। देश के अनेक हिस्सों से गैस सिलिंडर की कमी, बुकिंग में देरी और डिलीवरी में व्यवधान जैसी खबरें तेजी से फैलने लगीं। सोशल मीडिया पर लोगों की चिंता देखकर यह विषय […]
स्वराज्य ही उनके लिए सर्वस्व था : छत्रपति संभाजी महाराज

-डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारतीय इतिहास के पन्नों को जब भी पलटा जाएगा, तब वीरता, संघर्ष और स्वराज्य की रक्षा के प्रेरणापुंज छत्रपति संभाजी महाराज का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाएगा। उनका संपूर्ण जीवन अदम्य साहस, अटूट आत्मसम्मान और धर्म तथा स्वराज्य के लिए सर्वोच्च बलिदान की प्रेरक गाथा है। 11 मार्च 1689 का […]
नारी सशक्तिकरण में नई मिसाल बना मध्यप्रदेश: स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण की योजनाओं से बदल रही महिलाओं की तस्वीर

भोपाल । मध्यप्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बीते कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिलाओं और बालिकाओं के स्वास्थ्य पोषण सुरक्षा संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया है। […]
मध्य प्रदेश में ग्राम सभाओं से सशक्त होंगी महिलाएं

– प्रद्युम्न शर्मा हर वर्ष आठ मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के अधिकारों, समानता और सम्मान के संघर्ष का प्रतीक है। यह दिन समाज को यह याद दिलाने का अवसर भी है कि महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण के बिना समावेशी विकास संभव नहीं है। इसी सोच को व्यवहार में उतारने […]
नारी सम्मान ही सभ्य, सुसंस्कृत होने की पहचान

विनोद बब्बरयस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता अथार्त जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। इसी प्रकार कहा गया- ‘न गृहं गृह मित्याहु गृहिणी गृह मुच्यते’. सच ही है परिवार संस्था की संकल्पना नारी के बिना व्यर्थ है। महल हो या टूटी झोंपड़ी गृहलक्ष्मी के प्रवेश से ही घर बनता है। परिवार के […]
समावेशी विकास की ओर बढ़ता मध्य प्रदेश: केंद्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार

– प्रद्युम्न शर्मामध्य प्रदेश में इस साल मनाए जा रहे किसान कल्याण वर्ष की पहली कृषि कैबिनेट जनजातीय बहुल जिले बड़वानी में होना और उसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में अनेक किसानों के हित में निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ना आज बता रहा है कि राज्य विकास के धरातल पर अपनी […]
होलिका दहन पर वामपंथी कलुष

– कैलाश चन्द्र भारत की सांस्कृतिक स्मृति पर जितने हमले बाहरी आक्रांताओं ने नहीं किए, उससे कहीं अधिक गहरे और कहीं अधिक धूर्त हमले आज के वैचारिक उपनिवेशवादियों ने किए हैं। यह हमला तलवारों का नहीं, शब्दों का है। यह आक्रमण सीमाओं का नहीं, स्मृति का है। वस्तुत: आज जो लोग होली, होलिका दहन और […]
विनायक दामोदर सावरकर : एक विचार, एक क्रांति, एक युग
डॉ. निवेदिता शर्मा एक विचार, एक क्रांति, एक युग यदि इन शब्दों में किसी व्यक्तित्व को समेटना हो तो वह नाम है स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर जी का। उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति को ही अपने जीवन का परम ध्येय बनाया। उनके लिए स्वाधीनता राष्ट्रीय चेतना की पुकार थी। उनका संपूर्ण जीवन इस सत्य का प्रमाण है […]