Mahakaushal Times

तपती धरती: बढ़ती गर्मी के कारण और समाधान की राह

उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वी भारत तक इन दिनों भीषण गर्मी ने लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी हीटवेव अलर्ट के बीच तापमान 40 से 44 डिग्री तक पहुंच चुका है। यह सिर्फ मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकेत है, […]

मजदूर दिवस की कहानी: खून, संघर्ष और हक की जीत की ऐतिहासिक गाथा

दुनियाभर में हर साल 1 मई को मनाया जाने वाला मजदूर दिवस सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रमिकों के संघर्ष, बलिदान और अधिकारों की ऐतिहासिक जीत का प्रतीक है। आज हम जिस 8 घंटे के कार्यदिवस को सामान्य मानते हैं, वह कभी मजदूरों का सपना हुआ करता था एक ऐसा सपना, जिसे पाने के […]

अनुसूचित जाति आरक्षण और मतांतरण: संवैधानिक सीमाएँ, न्यायिक दृष्टिकोण

-कैलाश चन्द्रभारत का संवैधानिक ढाँचा अनुसूचित जातियों (एससी) को उन ऐतिहासिक सामाजिक विषमताओं से उबारने के लिए विशेष संरक्षण और आरक्षण प्रदान करता है, जो सदियों से चले आ रहे अस्पृश्यता, बहिष्कार और जातिगत उत्पीड़न से उत्पन्न हुई हैं। यह व्यवस्था केवल आर्थिक पिछड़ेपन का समाधान नहीं है बल्कि एक गहरे सामाजिक अन्याय के प्रतिकार […]

जानलेवा हो सकती है मलेरिया के इलाज में लापरवाही

विश्व मलेरिया दिवस (25 अप्रैल) पर विशेष – योगेश कुमार गोयलमलेरिया एक गंभीर और कभी-कभी प्राणघातक हो जाने वाली बीमारी है, जो आमतौर पर एक निश्चित प्रकार के मच्छर को संक्रमित करने वाले परजीवी के कारण होती है और इन संक्रमित मच्छरों के काटने से मलेरिया होता है। अमेरिका से करीब 70 साल पहले ही […]

आचार्य महाश्रमण की निर्गुण-चेतना से विश्व-शांति की नई दिशा

आचार्य महाश्रमण के 65वें जन्मदिवस पर विशेष – ललित गर्ग मानव इतिहास के इस अशांत और संक्रमणकालीन दौर में जब विश्व का परिदृश्य युद्ध हिंसा आतंकवाद और वैचारिक टकरावों से आच्छादित है तब शांति सह अस्तित्व और मानवीय मूल्यों की पुकार पहले से कहीं अधिक तीव्र हो उठी है। ऐसे समय में आचार्य महाश्रमण एक […]

महिला आरक्षण की अधूरी यात्रा और लोकतंत्र

– विवेक रंजन श्रीवास्तव भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त उसकी विविधता और समावेशिता है। लेकिन जब लोकसभा में ही महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का संविधान संशोधन वर्षों तक पारित नहीं हो सका, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हमारा लोकतंत्र वास्तव में आधी आबादी को बराबरी का अवसर देने की इच्छा […]

जन-जन को मिले जलाधिकार

– डॉ.वेदप्रकाशकुछ लोग जल का व्यापार करें और कुछ लोग बूंद बूंद को तरसें। क्या यह जन-जन के जलाधिकार का हनन नहीं है? शासन- प्रशासन मौन क्यों है? क्या हम नहीं जानते कि जल जीवन तत्व है,अमृत है और प्रत्येक जीवधारी के लिए परमात्मा द्वारा दिया गया उपहार है। जल के बिना न तो जीवन […]

सिविल सेवा : देश की प्रशासनिक व्यवस्था की “रीढ़”

– प्रदीप कुमार वर्मा भारतीय संवैधानिक प्रावधानों में तीसरी स्तंभ कहे जाने वाले कार्यपालिका के तहत सिविल सर्विस वह सेवा है, जो देश की सरकार के सार्वजनिक प्रशासन के लिए जिम्मेदार है। भारत में सिविल सेवा में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा ,भारतीय विदेश सेवा और अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवा समूह शामिल […]

वात्सल्य पीठ: करुणा, साधना और आत्मोन्नति का दिव्य तीर्थ

-ललित गर्ग दिल्ली जैसे महानगर की आपाधापी भागदौड़ और संवेदनहीनता के बीच यदि कोई ऐसा स्थान निर्मित हो जहाँ पहुंचते ही मन शांत हो जाए आत्मा को विश्राम मिले और जीवन को एक नई दिशा का बोध हो तो निश्चय ही वह स्थान साधारण नहीं बल्कि दिव्यता का स्पंदित केन्द्र होता है। वात्सल्य पीठ ऐसा […]

मुद्दा : जन भागीदारी से होगा हमारी विरासत का संरक्षण

-प्रदीप कुमार वर्मामिस्र की राजधानी काहिरा के पास गीज़ा पठार पर नील नदी के पश्चिमी तट पर स्थित गीजा के पिरामिड। रोम का ऐतिहासिक एम्फीथिएटर। चट्टानों को काटकर बनाया गया जॉर्डन का पेट्रा शहर। और विश्व के सात अजूबों में शामिल भारत का ताजमहल। यह सभी विश्व विरासत की एक बानगी भर हैं। देश और […]