चुनौतियों के चक्रव्यूह के बीच खड़ा बिहार का नया ‘सम्राट’

-योगेश कुमार गोयलबिहार की राजनीति में सत्ता का शिखर छूना जितना कठिन है, उससे कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है उस शिखर पर टिके रहकर अपनी सर्वमान्यता सिद्ध करना। सम्राट चौधरी का बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में उदय राज्य के सियासी इतिहास में एक नए युग का सूत्रपात माना जा रहा है। यह केवल एक […]
नारी-आरक्षणः नये भारत का आधार एवं संभावनाओं का शिखर

-ललित गर्ग नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर भारत की राजनीति और समाज में जो नई चेतना उभरकर सामने आई है, वह केवल एक विधायी परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक रूपांतरण एवं नये भारत-निर्माण की संभावनाओं की प्रस्तावना है। निश्चिततौर पर भारत अब अपने विकास की धुरी में महिलाओं की सक्रिय और […]
महाशक्ति टकराव और वैश्विक अस्थिरता: क्या दुनिया महाविनाश की ओर बढ़ रही है?

– अशोक कुमार झाआज का विश्व एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ हर दिन के साथ अनिश्चितता और अस्थिरता बढ़ती प्रतीत हो रही है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि विश्व व्यवस्था एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है। विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव न […]
डॉ. भीमराव आंबेडकर: बहुआयामी व्यक्तित्व का समग्र परिप्रेक्ष्य

-डॉ. सदानंद दामोदर सप्रेभारतीय इतिहास में कुछ महान व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी छवि समाज के सामने सीमित रूप में प्रस्तुत होती है, जबकि उनका वास्तविक योगदान उससे कहीं अधिक व्यापक और बहुआयामी होता है। डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर भी ऐसे ही एक महान पुरुष हैं। सामान्यतः उन्हें केवल “संविधान निर्माता” या “दलितों के उद्धारक” […]
हमारे जनप्रतिनिधि और संविधान: जनता की आवाज का प्रतिनिधित्व

डॉ राकेश कुमार आर्य. देश की संसद अर्थात शीर्ष सभा के सभासद कैसे हों ? – इस पर अपना मत व्यक्त करते हुए ऋषि दयानन्द ने लिखा है कि ” सभा में चारों वेद, कारण अकारण का ज्ञाता न्यायशास्त्र, निरुक्त, धर्मशास्त्र आदि के वेत्ता विद्वान् ब्रह्मचारी, गृहस्थ और वानप्रस्थ सभासद् हों। देश विषयक प्रमुख निर्णय […]
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर: संविधान निर्माता और सामाजिक क्रांति के नायक..

प्रदीप कुमार वर्माभारतीय संविधान के कुशल शिल्पकार, वंचित एवं दलितों के मसीहा, कुशल राजनीतिक एवं प्रखर समाजशास्त्री, एक समर्पित शिक्षक और श्रमजीवी पत्रकार और तत्कालीन भारतीय समाज के एक महान समाज सुधारक। एक जमाना था जब भारतीय समाज जाति एवं कुरीतियों के बंधनों में जकड़ा हुआ था और समाज के दलित और वंचित तबके को […]
अब नहीं पनपेंगे माओवादी : जरा याद इन्हें भी कर लो

– कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल देश से सशस्त्र माओवादी आतंक का खात्मा हो गया है। लेकिन अर्बन नक्सलियों का माड्यूल अभी भी सक्रिय है। नक्सलवाद-माओवाद के ख़ूनी पंजों ने चारो ओर कैसे दहशत फैला रखी थी? उसकी गवाह हर वो तारीख़े हैं जब-जब हमारे वीर जवानों ने माओवादियों से लोहा लिया। छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में, बस्तर […]
उपेक्षित आबादी बनाम वैश्विक एजेंडा: असली मुद्दे क्यों ओझल हो रहे हैं?

-कैलाश चन्द्रभारत का सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य जितना विशाल है, उतना ही जटिल भी है। इस जटिलता के बीच आज हमारे सामने दो वास्तविकताएँ खड़ी हैं। पहली, भारत के ग्यारह करोड़ से अधिक घुमन्तु, अर्धघुमन्तु और डिनोटिफाइड जनजाति समुदाय जिन्हें डीएनटी, एनटी और एसएनटी के रूप में भी जाना जाता है, जोकि आज भी पहचान, आवास, शिक्षा, […]
वीआईपी दर्शन के बढ़ते चलन में आम श्रद्धालु कहाँ खड़ा है?

डॉ. सत्यवान सौरभ भारत जैसे देश में जहाँ धर्म और आस्था केवल व्यक्तिगत विश्वास का विषय नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं वहाँ मंदिरों और तीर्थ स्थलों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। ये स्थान सदियों से समानता शांति और आध्यात्मिक संतुलन के प्रतीक माने जाते रहे हैं। भगवान के दरबार […]
नारी शिक्षा के अग्रदूत ज्योतिबा फुले

– मोहन मंगलमज्योतिबा फुले के संक्षिप्त नाम से ख्यात महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले महान समाजसेवी, समाज सुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, लेखक, दार्शनिक, विचारक, लेखक और क्रांतिकारी कार्यकर्ता थे। उनकी विचारधारा स्वतंत्रता, समतावाद और समाजवाद पर आधारित थी। महिलाओं तथा पिछड़ों व अछूतों के उत्थान के लिए उन्होंने अनेक कार्य किए। उनका जीवन असमानता, जातिगत भेदभाव […]