Mahakaushal Times

समावेशी विकास की ओर बढ़ता मध्य प्रदेश: केंद्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार

– प्रद्युम्न शर्मामध्य प्रदेश में इस साल मनाए जा रहे किसान कल्याण वर्ष की पहली कृषि कैबिनेट जनजातीय बहुल जिले बड़वानी में होना और उसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में अनेक किसानों के हित में निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ना आज बता रहा है कि राज्‍य विकास के धरातल पर अपनी […]

होलिका दहन पर वामपंथी कलुष

– कैलाश चन्द्र भारत की सांस्कृतिक स्मृति पर जितने हमले बाहरी आक्रांताओं ने नहीं किए, उससे कहीं अधिक गहरे और कहीं अधिक धूर्त हमले आज के वैचारिक उपनिवेशवादियों ने किए हैं। यह हमला तलवारों का नहीं, शब्दों का है। यह आक्रमण सीमाओं का नहीं, स्मृति का है। वस्‍तुत: आज जो लोग होली, होलिका दहन और […]

विनायक दामोदर सावरकर : एक विचार, एक क्रांति, एक युग

डॉ. निवेदिता शर्मा एक विचार, एक क्रांति, एक युग यदि इन शब्दों में किसी व्यक्तित्व को समेटना हो तो वह नाम है स्‍वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर जी का। उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्‍ति को ही अपने जीवन का परम ध्येय बनाया। उनके लिए स्वाधीनता राष्ट्रीय चेतना की पुकार थी। उनका संपूर्ण जीवन इस सत्य का प्रमाण है […]

विकास का सशक्त विजन : एक ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी मध्यप्रदेश आज एक ऐसे परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है, जहाँ विकास नारा न होकर धरातल पर उतरती हुई वास्तविकता बन चुका है। राज्य की आर्थिक गति, औद्योगिक विस्तार, कृषि समृद्धि और रोजगार सृजन की दिशा में हो रहे सतत प्रयासों ने इसे देश के तेजी से उभरते राज्यों की श्रेणी […]

वैदिक चेतना से सामाजिक क्रांति तक भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत महर्षि दयानंद सरस्वती – आचार्य ललित मुनि

 आचार्य ललित मुनिउन्नीसवीं सदी का भारत गहरे संक्रमण का समय था। एक ओर अंग्रेजी शासन का राजनीतिक वर्चस्व था, दूसरी ओर समाज भीतर से जर्जर हो चुका था। धार्मिक जीवन कर्मकांडों में उलझा हुआ था, जातिगत ऊंच नीच ने सामाजिक एकता को तोड़ दिया था, स्त्रियों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी और शिक्षा का दायरा […]

वन्दे मातरम्: राष्ट्र चेतना का सनातन गीत और आधुनिक भारत का पुनर्जागरण

– कैलाश चंद “वन्दे मातरम्” ये दो शब्द सिर्फ एक नारा नहीं, भारत की आत्मा का गूढ़ और दिव्य उद्गार हैं। यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारतीय राष्ट्रवाद की आध्यात्मिक जड़ है, जो भूमि, संस्कृति, शक्ति और ज्ञान इन चारों को मातृभाव में एक सूत्र में पिरोता है। जब कोई भारतीय “वन्दे मातरम्” कहता […]

कुलधर्म, दांपत्य और आधुनिकता का द्वंद्व

दीपक कुमार द्विवेदी फरवरी का महीना आते ही वातावरण में एक अलग प्रकार की हलचल दिखाई देने लगती है। बाजारों में लाल रंग की सजावट, उपहारों की भरमार, सामाजिक माध्यमों पर प्रदर्शित संबंध, और वेलेंटाइन डे तथा प्रॉमिस डे के नाम पर बढ़ती व्यावसायिक सक्रियता ये सब केवल एक उत्सव का विस्तार नहीं, बल्कि सामाजिक […]

त्वरित विकास को समर्पित कल्याणकारी केन्‍द्रीय बजट

-डॉ. महेन्द्र सिंह केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए संसद में पेश किया गया गया बजट देश के त्वरित विकास को समर्पित कल्याणकारी बजट है। इस बजट में समाहित प्रस्तावों में आर्थिक विकास की गति को बढ़ाने और उसे निरन्तर बनाये रखने पर जोर दिया गया है। साथ ही, लोककल्याण के लिए […]

रक्षा बजट 2026-27 से बढ़ेगी सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भरता.

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत केंद्रीय बजट में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है। वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों, क्षेत्रीय चुनौतियों और चल रहे अभियानों को ध्यान में रखते हुए रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि भारत की दीर्घकालिक सैन्य रणनीति, आत्मनिर्भरता और […]

पत्थर के देवता- डॉ. नारायण व्यास: ये हैं समय, शिला और सभ्‍यता के मौन साधक

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी मध्य प्रदेश की धरती पर जब भी पत्थरों की भाषा पढ़ी जाती है, शिलाओं पर उकेरे गए आदिम मनुष्य के सपने समझे जाते हैं और गुफाओं की दीवारों पर जब सांस लेते इतिहास को अनुभूत किया जाता है, तब अनायास ही एक नाम सामने आता है; भारत के महान पुरातत्त्वविद्, चित्रकार, […]