बोर्ड ने कहा है कि नई पुस्तकों को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही कई जानकारियां अधूरी और भ्रामक हैं। परिषद के अनुसार पाठ्यपुस्तकों में किसी प्रकार के तथ्यात्मक बदलाव या सांस्कृतिक पक्षपात के आरोप निराधार हैं। शिक्षा बोर्ड का कहना है कि नई किताबों को निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रियाओं, विशेषज्ञों की सलाह और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दिशा-निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया है।
विवाद का सबसे चर्चित पहलू ‘कृष्णा’ नाम से जुड़ा रहा। सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि नई कन्नड़ पुस्तक में ‘कृष्णा’ नाम को हटाया गया या उसमें बदलाव किया गया है। इस पर NCERT ने स्पष्ट किया कि जिस संदर्भ की चर्चा की जा रही है, वह भूगोल विषय से संबंधित है और उसमें भारत की प्रमुख नदियों का वर्णन किया गया है। बोर्ड के अनुसार पुस्तक में कृष्णा नदी का नाम यथावत मौजूद है और उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। परिषद ने कहा कि भौगोलिक तथ्यों को पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है।
दूसरा विवाद भोजन संस्कृति से जुड़ा रहा। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पुस्तक में भारतीय खान-पान की विविधता को दर्शाते समय मांसाहारी भोजन के उल्लेख को शामिल नहीं किया गया। इस पर NCERT ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए सामग्री तैयार की जाती है। पुस्तकों में विभिन्न क्षेत्रों की जीवनशैली, परंपराओं और खान-पान संबंधी विशेषताओं को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। बोर्ड का कहना है कि किसी विशेष भोजन पद्धति को जानबूझकर बाहर रखने का दावा वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता।
NCERT ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार की जा रही नई पुस्तकों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रटने की शिक्षा देना नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझ और अनुभव आधारित सीखने को बढ़ावा देना है। इसी दृष्टिकोण से पाठ्यसामग्री को सरल, स्थानीय और विद्यार्थियों के परिवेश से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। कई बार क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद के दौरान उदाहरणों और संदर्भों को स्थानीय संदर्भों के अनुरूप प्रस्तुत किया जाता है, जिससे कुछ लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
बोर्ड ने कहा कि यदि किसी पाठ्यपुस्तक में भाषाई, तकनीकी या अनुवाद संबंधी कोई त्रुटि सामने आती है, तो उसे विशेषज्ञ समितियों की समीक्षा के बाद सुधारा जाता है। ऐसे मामलों को किसी छिपे हुए एजेंडे या बड़े वैचारिक बदलाव के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। शिक्षा से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर ही चर्चा होनी चाहिए।
NCERT ने अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें। परिषद का कहना है कि सभी नई पाठ्यपुस्तकें और उनका डिजिटल संस्करण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, जहां कोई भी व्यक्ति सामग्री की स्वयं जांच कर सकता है। बोर्ड ने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, तथ्यात्मकता और शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।