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मानसून से पहले निगम का ‘ऑपरेशन डेंजर’ तेज: इंदौर में 100 से अधिक जर्जर इमारतें रडार पर, हादसे रोकने के लिए कार्रवाई शुरू


मध्‍य प्रदेश । मानसून के आगमन से पहले इंदौर नगर निगम ने शहरवासियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जर्जर और खतरनाक भवनों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। बारिश के मौसम में पुराने और कमजोर ढांचों के गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए निगम प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। इसी उद्देश्य से नगर निगम ने ‘ऑपरेशन डेंजर’ के तहत शहरभर में चिन्हित खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई तेज कर दी है।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर ऐसे भवनों की पहचान की गई है, जो अत्यधिक जर्जर स्थिति में हैं और बारिश के दौरान किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं। प्रारंभिक सर्वे में 100 से अधिक भवनों को जोखिमपूर्ण श्रेणी में रखा गया है। इन भवनों को नगर निगम की विशेष निगरानी सूची में शामिल किया गया है और संबंधित संपत्ति मालिकों को कानूनी नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।

नगर निगम के अपर आयुक्त प्रखर सिंह के मुताबिक, अभियान का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि जिन इमारतों की स्थिति अत्यंत खतरनाक पाई गई है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। कई स्थानों पर निगम की टीमें मौके पर पहुंचकर जर्जर संरचनाओं को हटाने और ध्वस्त करने का कार्य कर रही हैं ताकि किसी अप्रिय घटना की संभावना को पहले ही समाप्त किया जा सके।

अभियान के तहत शहर के अलग-अलग जोन और वार्डों में निगम की टीमें सक्रिय हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से भवनों की स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि मानसून पूरी तरह सक्रिय होने से पहले सभी गंभीर रूप से खतरनाक भवनों पर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाए।

नगर निगम ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में कोई भवन अत्यधिक जर्जर दिखाई देता है या उसकी स्थिति लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दी जानी चाहिए। इसके अलावा जिन मकान मालिकों के भवन कमजोर या क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं, उन्हें भी समय रहते आवश्यक मरम्मत या अन्य सुरक्षा उपाय करने की सलाह दी गई है।

प्रशासन का मानना है कि नागरिकों की सतर्कता और प्रशासन की सक्रियता मिलकर संभावित दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोक सकती है। इसी कारण निगम लगातार जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी कर रहा है ताकि लोग जोखिमपूर्ण भवनों के प्रति गंभीरता दिखाएं।

जर्जर भवनों पर कार्रवाई के साथ-साथ नगर निगम ने मानसून से जुड़ी अन्य चुनौतियों से निपटने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी, नालों की सफाई, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और कंट्रोल रूम की सक्रियता बढ़ाई गई है। निगम का दावा है कि बारिश के मौसम में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें चौबीसों घंटे तैयार रहेंगी।

नगर निगम का कहना है कि सुरक्षित और व्यवस्थित शहर उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी दिशा में मानसून पूर्व यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि बारिश के दौरान नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और संभावित हादसों को समय रहते रोका जा सके।

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