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CTC बनाम इन-हैंड सैलरी: ₹62 लाख की Google नौकरी से ज्यादा बचत कर रहा ₹36 लाख वाला WFH प्रोफेशनल!



नई दिल्ली। बड़ी सैलरी सुनते ही अक्सर लोगों को लगता है कि हर महीने मोटी कमाई हाथ में आती होगी, लेकिन टेक इंडस्ट्री की हकीकत कई बार इससे बिल्कुल अलग होती है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक उदाहरण चर्चा में आया, जिसमें Google में ₹62 लाख CTC पाने वाले कर्मचारी की तुलना एक वर्क फ्रॉम होम कॉन्ट्रैक्टर से की गई, जिसकी सालाना कमाई ₹36 लाख बताई गई।

स्टार्टअप Wavelength के फाउंडिंग इंजीनियर देवांश भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि Google के कर्मचारी के पैकेज में बेसिक सैलरी, बोनस और RSU यानी स्टॉक ग्रांट शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ₹62 लाख के पैकेज में करीब ₹22 लाख बेसिक सैलरी, ₹35 लाख RSU और ₹5 लाख बोनस शामिल है।

हालांकि RSU तुरंत कैश के रूप में नहीं मिलते, बल्कि कई वर्षों में हिस्सों में जारी किए जाते हैं। इसी वजह से टैक्स कटने के बाद कर्मचारी की मासिक इन-हैंड सैलरी लगभग ₹1.5 लाख से ₹1.8 लाख तक रह जाती है।

वहीं दूसरी ओर रिमोट कॉन्ट्रैक्टर की अधिकतर कमाई सीधे कैश में होती है। साथ ही आयकर कानून की धारा 44ADA के तहत टैक्स छूट का फायदा मिलने से उसकी टैक्सेबल इनकम कम हो जाती है। ऐसे में रिपोर्ट के अनुसार टैक्स के बाद उसकी इन-हैंड कमाई करीब ₹2.7 लाख प्रति माह तक पहुंच सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि CTC और इन-हैंड सैलरी में बड़ा अंतर सैलरी स्ट्रक्चर की वजह से होता है। बड़ी कंपनियां बोनस, स्टॉक और अन्य बेनिफिट्स को CTC में जोड़ देती हैं, जबकि कॉन्ट्रैक्ट या रिमोट जॉब में भुगतान अधिकतर सीधे कैश में मिलता है।

हालांकि केवल इन-हैंड सैलरी के आधार पर नौकरी का मूल्यांकन करना सही नहीं माना जाता। बड़ी कंपनियों में नौकरी की स्थिरता, हेल्थ बेनिफिट्स, ब्रांड वैल्यू और लंबी अवधि की करियर ग्रोथ जैसे फायदे भी महत्वपूर्ण होते हैं, जबकि रिमोट जॉब में ज्यादा कैश फ्लो और कम खर्च का लाभ मिलता है।

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