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दुबई नेटवर्क से जुड़े ड्रग माफिया का खुलासा: तुर्किए में ‘हमजा’ बनकर छिपा था सलीम डोला, भारत लाकर NCB की बड़ी कार्रवाई


नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी रैकेट पर सुरक्षा एजेंसियों की सख्त कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ भारत को बड़ी सफलता मिली है। तुर्किये से प्रत्यर्पित कर भारत लाए गए कुख्यात तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि वह तुर्किये में ‘हमजा’ नाम से रह रहा था और उसने पहचान छुपाने के लिए कथित तौर पर बुल्गारियाई पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था।

मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को उसे 8 मई तक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की हिरासत में भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, डोला की गतिविधियां लंबे समय से जांच एजेंसियों की रडार पर थीं और उसे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

फर्जी पहचान और विदेशी पासपोर्ट का खेल
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि सलीम डोला तुर्किये में ‘हमजा’ नाम से रह रहा था और उसके पास बुल्गारियाई पासपोर्ट था। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह पासपोर्ट वैध था या फर्जी। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की गहन जांच कर रही हैं कि उसे यह दस्तावेज कैसे और किस नेटवर्क के जरिए मिला।

इस खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फर्जी पहचान और पासपोर्ट रैकेट के एक बड़े नेटवर्क की आशंका को भी मजबूत किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल अक्सर ड्रग तस्करी और अवैध कारोबार को छिपाने के लिए किया जाता है।

दाऊद इब्राहीम कनेक्शन की जांच
NCB ने मुंबई अदालत को बताया कि सलीम डोला का नाम कुख्यात अपराधी दाऊद इब्राहीम के नेटवर्क से जुड़ा हुआ पाया गया है। उसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी रैकेट में एक प्रमुख सप्लायर के रूप में देखा जा रहा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, डोला का नाम पहली बार तब सामने आया जब जून 2023 में दक्षिण मुंबई से मेफेड्रोन की बड़ी खेप जब्त की गई थी। इस मामले में वह मुख्य आपूर्तिकर्ता माना जा रहा है। इसके बाद से ही उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।

भारत वापसी के बाद बढ़ी जांच की रफ्तार
तुर्किये से भारत लाए जाने के बाद NCB ने उससे पूछताछ तेज कर दी है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसका नेटवर्क किन-किन देशों तक फैला हुआ है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

साथ ही यह भी जांच का विषय है कि वह इतने लंबे समय तक विदेश में फर्जी पहचान के साथ कैसे छिपा रहा और उसे किस अंतरराष्ट्रीय मदद नेटवर्क का सहारा मिला।

अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट पर बड़ा वार
इस गिरफ्तारी को भारत की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि ड्रग तस्करी अब सीमाओं से परे एक वैश्विक संगठित अपराध बन चुकी है।

आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है, जिससे कई देशों में फैले नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है। 

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