शोध के अनुसार, यह टूल शरीर में होने वाले शुरुआती मॉलिक्यूलर बदलावों को पकड़ने की क्षमता रखता है, जो सामान्य लक्षणों जैसे छाती में दर्द या सांस फूलने से बहुत पहले शुरू हो जाते हैं।
इस AI मॉडल को तैयार करने के लिए शोधकर्ताओं ने डीप लर्निंग तकनीक और मल्टीओमिक्स डेटा (जीनोमिक्स, प्रोटिओमिक्स और मेटाबोलोमिक्स) का उपयोग किया है। स्टडी में यूके बायोबैंक के बड़े पैमाने के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें हजारों ब्लड प्रोटीन और मेटाबोलाइट्स शामिल थे, जो दिल की सेहत से जुड़े संकेत दिखाते हैं।
शोध के मुताबिक यह सिस्टम कोरोनरी आर्टरी डिजीज, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर, एट्रियल फिब्रिलेशन और अन्य कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के जोखिम का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह तकनीक अभी रिसर्च और वैलिडेशन के स्तर पर है और इसे आम मरीजों के लिए क्लिनिकल उपयोग में लाने से पहले और परीक्षणों की जरूरत होगी।
अगर यह तकनीक सफल होती है, तो भविष्य में हार्ट डिजीज की शुरुआती पहचान और रोकथाम के तरीके पूरी तरह बदल सकते हैं।