बताया जा रहा है कि जिले में लंबे समय से 108 एंबुलेंस सेवाओं के मनमाने संचालन और लापरवाही को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप था कि समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचती, कई बार फोन रिस्पॉन्स नहीं मिलता और सेवाओं का संचालन बेहद अव्यवस्थित हो चुका था। इससे लोगों का भरोसा भी लगातार कम हो रहा था।
कुछ दिन पहले सेवा संचालक कंपनी ने भी जिला प्रबंधक को हटाया था। इसके बाद अब नोडल स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि निगरानी और समन्वय मजबूत होने से एंबुलेंस सेवाओं में सुधार आएगा।
16 मई को सामने आई एक घटना ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया था। हसन खान को एंबुलेंस कर्मियों के कथित असंवेदनशील रवैये के कारण अपनी बीमार मां को पीठ पर उठाकर ले जाना पड़ा था। इस घटना का वीडियो और शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंचीं, जिसके बाद विभाग पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया।
हालांकि विभागीय आदेश में नोडल प्रभारी बदलने का कारण “प्रशासकीय कार्य सुविधा” बताया गया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि एंबुलेंस सेवाओं की निगरानी में गंभीर लापरवाही के कारण यह निर्णय लिया गया। लगातार बिगड़ती व्यवस्था और बढ़ती शिकायतों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे।
इस मामले में डॉ. मनीष मिश्रा ने कहा कि नोडल 108 के प्रभार में बदलाव उच्च स्तर से मिले निर्देशों के अनुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग अब एंबुलेंस सेवाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार निगरानी करेगा।