उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनका बेटा कई दिनों तक उनके साथ ही था और ऐसे में वह किसी वारदात में शामिल कैसे हो सकता है। मां का कहना है कि पूरा परिवार लखनऊ में एक शादी समारोह में शामिल होने गया था, जिसके बाद धार्मिक यात्रा भी की गई।
शादी से लेकर अयोध्या दर्शन तक का सफर
जामवंती सिंह के मुताबिक, 7 तारीख को राज लखनऊ में एक एमएलसी की बेटी की शादी में शामिल होने गया था। इसी दौरान परिवार ने भी साथ चलने की इच्छा जताई। इसके बाद पूरा परिवार राज, ड्राइवर, एक दोस्त, एक अन्य व्यक्ति और स्वयं मां लखनऊ पहुंचा और एक गेस्ट हाउस में रुका।
रात में राज शादी समारोह में गया और बाद में वापस लौट आया। अगले दिन सुबह सभी लोग अंबेडकर नगर स्थित किछौछा शरीफ पहुंचे, जहां उन्होंने दरगाह पर चादर चढ़ाई। इसके बाद परिवार अयोध्या गया और वहां राम मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। मां ने कहा कि पूरे दिन की यात्रा के बाद सभी ने रास्ते में भोजन किया और सामान्य रूप से समय बिताया।
अचानक गिरफ्तारी का आरोप
राज की मां का कहना है कि जब वे अयोध्या से लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी को पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद बेटे को हिरासत में ले लिया गया और परिवार को महिला थाने में बैठा दिया गया। उनके अनुसार, पूरी रात उन्हें मामले की जानकारी नहीं दी गई। अगले दिन थोड़ी देर के लिए बेटे से मुलाकात कराई गई, जिसके बाद पता चला कि कोलकाता पुलिस उसे अपने साथ ले जा रही है। मां ने रोते हुए कहा कि उन्हें अब तक नहीं पता कि उनका बेटा कहां है और उसे किस आधार पर ले जाया गया।
CCTV और मोबाइल रिकॉर्ड का दावा
जामवंती सिंह ने दावा किया कि उनके पास बेटे की मौजूदगी के कई सबूत हैं। उन्होंने कहा कि घर के CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड से यह साबित हो सकता है कि राज लगातार परिवार के साथ था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़े तो शादी समारोह, बाजार और यात्रा के सभी वीडियो और सबूत जांच एजेंसियों को दिए जा सकते हैं।
आपराधिक रिकार्ड
राज सिंह की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें वह यूपी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह, बीजेपी विधायक प्रिंसू सिंह और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ नजर आ रहा है। पुलिस के अनुसार, राज का आपराधिक इतिहास भी रहा है। वर्ष 2020 में उस पर एक अंडा व्यवसायी की हत्या का आरोप लगा था और वह फिलहाल जमानत पर बाहर था।
वहीं राज की मां ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सच सामने आना चाहिए और बिना ठोस सबूत के किसी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।