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भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में नई गति की उम्मीद, पीएम मोदी की यात्रा से वार्षिक समिट, आर्थिक सहयोग और लोगों के जुड़ाव को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तेजी से मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। यात्रा से पहले ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त नागेश सिंह ने दोनों देशों के बीच विकसित हो रहे रणनीतिक सहयोग, आर्थिक साझेदारी, रक्षा संबंधों, लोगों के बीच बढ़ते संपर्क और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह दौरा दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करेगा तथा भविष्य के सहयोग के लिए नए रास्ते खोलेगा।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दोनों देशों के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं। वर्ष 2020 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उनके अनुसार दोनों लोकतांत्रिक देशों के साझा मूल्य इस संबंध को और अधिक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

नागेश सिंह ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाए रखने के पक्षधर हैं। हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष और अस्थिरता के बावजूद भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध स्थिरता और भरोसे के साथ आगे बढ़े हैं। यही कारण है कि दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी एक-दूसरे के साथ समन्वय बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने आर्थिक सहयोग को भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार ऑस्ट्रेलिया के पास प्रचुर मात्रा में महत्वपूर्ण खनिज और प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं, जबकि भारत के पास विशाल बाजार और मजबूत विनिर्माण क्षमता है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनका मानना है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभदायक साबित होगी।

भारतीय उच्चायुक्त ने दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी जुड़ाव को भी संबंधों की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लगभग दस लाख लोग विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षा, व्यवसाय, राजनीति और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में भारतीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी दोनों देशों के बीच मजबूत सामाजिक और सांस्कृतिक पुल का कार्य कर रही है। इससे आपसी विश्वास और सहयोग को लगातार नई मजबूती मिल रही है।

उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आयोजित होने वाले वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन को भी विशेष महत्व का बताया। उनके अनुसार भारत बहुत कम देशों के साथ हर वर्ष शीर्ष नेतृत्व स्तर पर नियमित शिखर बैठक आयोजित करता है। यह परंपरा दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और निरंतर संवाद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा उसी निरंतरता का हिस्सा है और इससे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई पहल सामने आने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री के ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित करने के लिए एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। उच्चायुक्त ने बताया कि इस कार्यक्रम को लेकर भारतीय समुदाय में व्यापक उत्साह है और देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होने पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल भारतीय समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों की गहराई को भी प्रदर्शित करेगा।

खेल सहयोग पर उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट से आगे बढ़कर अन्य खेलों में भी साझेदारी का विस्तार करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच खेलों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और नई खेल संस्कृतियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हो रही है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की द्विपक्षीय साझेदारी अपने स्वतंत्र आधार पर आगे बढ़ रही है और इसका मूल उद्देश्य शांति, स्थिरता, साझा विकास तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करना है।

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