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शिवपुरी में मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की चिंता: 10 दिन पिछड़ी टमाटर रोपाई, खराब हो सकती है तैयार पौध


मध्‍यप्रदेश । शिवपुरी जिले में मानसून की देरी किसानों के लिए चिंता का बड़ा कारण बनती जा रही है। समय पर बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं और खेतों में बुवाई तथा रोपाई का काम ठप पड़ा हुआ है। प्रदेश के प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में शामिल शिवपुरी में इस बार टमाटर की रोपाई सामान्य समय से 10 दिन से अधिक पीछे चल रही है। किसानों ने खेत और पौध दोनों तैयार कर लिए हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेती का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

जिले के कई गांवों में किसानों ने मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए पहले ही टमाटर की पौध तैयार कर ली थी। अधिकांश किसानों ने पौध को खेतों तक भी पहुंचा दिया है, लेकिन मिट्टी में नमी की कमी के कारण रोपाई शुरू नहीं हो पा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सूखी जमीन में रोपाई करने से पौध के खराब होने का खतरा रहता है, इसलिए किसान जोखिम लेने से बच रहे हैं।

सामान्य परिस्थितियों में जून के मध्य तक टमाटर की रोपाई का काम शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार मानसून की देरी ने पूरे कृषि चक्र को प्रभावित कर दिया है। किसान लगातार आसमान की ओर निगाहें टिकाए हुए हैं और अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो तैयार पौध जरूरत से अधिक बड़ी हो जाएगी। ऐसी स्थिति में पौध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और खेत में लगाने के बाद उसकी वृद्धि तथा उत्पादन क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे टमाटर की पैदावार घटने की आशंका बढ़ जाएगी।

किसान अशोक कुशवाह का कहना है कि यदि बारिश में और देरी हुई तो वर्तमान पौध अनुपयोगी हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों को नई पौध खरीदकर दोबारा रोपाई करनी पड़ेगी। इससे खेती की लागत में काफी वृद्धि होगी और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार किसानों ने बीज, पौध तैयार करने, खेत की तैयारी, मजदूरी और सिंचाई पर पहले ही खर्च कर दिया है। यदि तैयार पौध खराब होती है तो दोबारा निवेश करना पड़ेगा, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। शिवपुरी जिले की कृषि अर्थव्यवस्था में टमाटर उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां उत्पादित टमाटर मध्य प्रदेश के अलावा देश के कई अन्य राज्यों में भी भेजे जाते हैं। ऐसे में रोपाई में देरी का सीधा असर किसानों की आय और बाजार आपूर्ति पर पड़ सकता है।

केवल टमाटर ही नहीं, बल्कि सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई भी बारिश की कमी से प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय हो जाता है तो खेती का काम पटरी पर लौट सकता है, लेकिन 10 से 15 दिन की अतिरिक्त देरी उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार सामान्य से धीमी रही है। जहां आमतौर पर 15 से 16 जून तक प्रदेश में मानसून सक्रिय हो जाता है, वहीं इस बार इसकी प्रगति धीमी बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 25 जून के आसपास मानसून प्रदेश में सक्रिय हो सकता है।

मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार 1 जून से अब तक प्रदेश में सामान्य से 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसका असर विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। ऐसे में शिवपुरी सहित पूरे क्षेत्र के किसानों की उम्मीदें अब आगामी बारिश पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द अच्छी वर्षा होती है तो खेती की रफ्तार फिर से बढ़ सकती है, अन्यथा किसानों को उत्पादन और आय दोनों स्तरों पर नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

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