रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में चरमपंथी गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी को लेकर भी चिंता बढ़ी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि कई मामलों में नाबालिगों तक को कट्टरपंथी नेटवर्क के जरिए प्रभावित किया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि आतंकवाद से जुड़ी जांचों में अब कम उम्र के लोगों की संलिप्तता भी सामने आ रही है, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन रही है।
एक रिपोर्ट में “राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक चरमपंथ” (PMVE) को एक उभरता खतरा बताया है। इसके तहत ऐसे समूहों का जिक्र किया गया है, जो मौजूदा राजनीतिक ढांचे को बदलने या नए ढांचे स्थापित करने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं। एजेंसी के अनुसार, कुछ अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे हैं, जिससे स्थिति और जटिल होती जा रही है।
रिपोर्ट में 1985 की Air India Flight 182 bombing का भी उल्लेख किया गया है, जिसे आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला माना जाता है। इस हमले में 329 लोगों की जान गई थी, जिनमें अधिकांश कनाडाई नागरिक थे। जांच में उस समय खालिस्तानी चरमपंथी तत्वों की भूमिका सामने आई थी।
हालांकि रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि 2025 के दौरान कनाडा में इस तरह के समूहों से जुड़ा कोई बड़ा आतंकी हमला दर्ज नहीं हुआ, लेकिन उनकी गतिविधियां और नेटवर्क अब भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। एजेंसी का कहना है कि कुछ चरमपंथी तत्व स्थानीय संस्थाओं और सामाजिक नेटवर्क का दुरुपयोग कर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं, जिसमें फंडिंग जुटाने जैसे तरीके भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा का यह रुख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण संकेत है, खासकर भारत जैसे देशों के लिए, जो लंबे समय से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, CSIS की यह रिपोर्ट न केवल कनाडा की आंतरिक सुरक्षा चिंताओं को उजागर करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि वैश्विक स्तर पर चरमपंथ से निपटने के लिए अधिक सतर्क और समन्वित रणनीति की जरूरत है।