Mahakaushal Times

न्यूक्लियर डील से लेकर सीजफायर बातचीत तक, क्यों माने जाते हैं ईरान के सबसे भरोसेमंद कूटनीतिज्ञ



नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और बातचीत के दौर में एक नाम लगातार सुर्खियों में है अब्बास अराघची। ईरान के विदेश मंत्री अराघची को इस वक्त दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं का सबसे अहम चेहरा माना जा रहा है। उन्हें एक सख्त लेकिन संतुलित ‘डील मेकर’ के रूप में जाना जाता है, जो जटिल हालात में भी बातचीत को दिशा देने की क्षमता रखते हैं।

अराघची का कूटनीतिक सफर लंबा और बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 2015 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में हुए ऐतिहासिक ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) की बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी। उस समय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों और जर्मनी के साथ हुई इस डील में उनका रुख साफ, सख्त और रणनीतिक माना गया था।

आज के दौर में जब ईरान और अमेरिका के रिश्ते बेहद नाजुक मोड़ पर हैं, अराघची की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। वे न सिर्फ बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि ईरान के हितों को मजबूती से सामने भी रख रहे हैं। जानकार मानते हैं कि उनकी रणनीति ही तय करेगी कि यह वार्ता समझौते तक पहुंचेगी या फिर तनाव और बढ़ेगा।

अराघची की पहचान एक ऐसे कूटनीतिज्ञ के रूप में है जो बैकडोर डिप्लोमेसी और खुले मंच—दोनों जगह समान दक्षता से काम करते हैं। यही वजह है कि उन्हें ईरान की विदेश नीति का ‘क्राइसिस मैनेजर’ भी कहा जाता है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर