लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि गदर में तारा सिंह के किरदार के लिए पहले गोविंदा को चुना गया था। हालांकि निर्देशक अनिल शर्मा ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोविंदा को कभी इस फिल्म के लिए साइन नहीं किया गया था। उस समय वह फिल्म महाराजा की शूटिंग कर रहे थे और इसी दौरान अनिल शर्मा ने उन्हें गदर की कहानी सुनाई थी।
निर्देशक के अनुसार गोविंदा ने कहानी सुनने के बाद कहा कि इतनी बड़ी और भव्य फिल्म बनाना आसान नहीं होगा। उस दौर में पाकिस्तान की पृष्ठभूमि पर इतने बड़े स्तर पर फिल्म बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता था। यही वजह थी कि गोविंदा इस परियोजना की विशालता को लेकर आशंकित नजर आए। अनिल शर्मा ने साफ कहा कि तारा सिंह के किरदार के लिए उनकी पहली और अंतिम पसंद हमेशा सनी देओल ही थे।
फिल्म में सनी देओल ने तारा सिंह का किरदार निभाया जबकि अमीषा पटेल ने सकीना की भूमिका से दर्शकों का दिल जीत लिया। दोनों की जोड़ी को जबरदस्त लोकप्रियता मिली और फिल्म का देशभक्ति तथा प्रेम से जुड़ा भावनात्मक कथानक लोगों के दिलों में बस गया। फिल्म के संवाद और गीत भी आज तक याद किए जाते हैं।
निर्देशक ने यह भी बताया कि मुख्य अभिनेत्री के किरदार के लिए केवल काजोल ही नहीं बल्कि कई अभिनेत्रियों से बातचीत की गई थी। अंत में अमीषा पटेल को यह भूमिका मिली और उन्होंने अपने अभिनय से फिल्म को यादगार बना दिया। गदर उनके करियर की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में शामिल हो गई।
करीब 18 करोड़ 50 लाख रुपये के बजट में बनी गदर एक प्रेम कथा ने रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। फिल्म ने भारत और विदेशों में मिलाकर 133 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया और उस समय की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल हो गई। भारतीय बॉक्स ऑफिस पर भी इसने शानदार कमाई करते हुए कई रिकॉर्ड बनाए। आज भी गदर को हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में गिना जाता है और तारा सिंह का किरदार सनी देओल की पहचान बन चुका है। निर्देशक के इस पुराने खुलासे ने एक बार फिर यह चर्चा तेज कर दी है कि यदि गोविंदा ने इस कहानी पर अलग नजरिया अपनाया होता तो शायद हिंदी सिनेमा का इतिहास कुछ और होता। हालांकि अंततः यह फिल्म सनी देओल के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में बदल गई।