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मदर्स डे का इतिहास, शुरुआत और महत्व: माँ के निस्वार्थ प्रेम का वैश्विक उत्सव

मदर्स डे (Mother’s Day) एक ऐसा वैश्विक पर्व है जिसे माँ के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और समर्पण के सम्मान में मनाया जाता है। यह दिन हर साल अलग-अलग देशों में मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है, और इसका उद्देश्य मातृत्व के महत्व को समाज में पहचान दिलाना है।

इसकी शुरुआत कब और किसने की?
आधुनिक मदर्स डे की शुरुआत 1908 में अमेरिका में अन्ना जार्विस (Anna Jarvis) ने की थी। उन्होंने अपनी माँ एन रीव्स जार्विस के सम्मान में इस दिन को मनाने की पहल की थी, जिन्होंने समाज सेवा और महिलाओं के अधिकारों के लिए काम किया था।

अन्ना जार्विस ने पहली बार वेस्ट वर्जीनिया के एक चर्च में अपनी माँ की याद में एक छोटा कार्यक्रम आयोजित किया था। धीरे-धीरे यह विचार पूरे अमेरिका में फैल गया और 1914 में अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर दिया।

मदर्स डे क्यों मनाया जाता है?
मदर्स डे मनाने का मुख्य उद्देश्य माँ के योगदान को सम्मान देना और उनके प्रति आभार व्यक्त करना है। माँ वह पहली व्यक्ति होती है जो हमें जीवन देती है, हमारा पालन-पोषण करती है और हर कठिन समय में हमारे साथ खड़ी रहती है।

यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि माँ का प्रेम निस्वार्थ होता है और उसका स्थान जीवन में सबसे ऊंचा होता है। समाज में यह संदेश भी दिया जाता है कि माँ का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन किया जाना चाहिए।

आज के समय में इसका महत्व
आज मदर्स डे पूरी दुनिया में मनाया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों और परिवारों में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोग अपनी माँ को उपहार देते हैं, उनके साथ समय बिताते हैं और उनके प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करते हैं।

कुल मिलाकर मदर्स डे केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक भावना है जो हमें माँ के त्याग, प्रेम और जीवन में उनके महत्व को समझने का अवसर देती है। यह दिन हमें सिखाता है कि माँ का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।

-मदर्स डे 

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