आरोपों से किया इनका
सीबीआई पूछताछ के दौरान समर्थ और गिरिबाला सिंह ने अपने ऊपर लगे मारपीट तथा सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज किया है। दोनों का कहना है कि ट्विशा के साथ उनके संबंध सामान्य थे और उन्होंने किसी प्रकार का उत्पीड़न नहीं किया। जांच एजेंसी उनके बयानों का उपलब्ध साक्ष्यों से मिलान कर रही है।
घटनाक्रम का रीक्रिएशन
सोमवार को सीबीआई टीम ने पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन कराया। जांच अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जिस परिस्थिति में ट्विशा की मौत हुई, वह आत्महत्या थी या फिर किसी अन्य वजह से हुई घटना। जब्त किए गए सबूतों की फोरेंसिक जांच भी जारी है।
लिगेचर बेल्ट को लेकर बढ़े सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल उस लिगेचर बेल्ट को लेकर खड़ा हुआ है, जिसके सहारे ट्विशा फंदे पर लटकी मिली थीं। जांच में सामने आया है कि घटनास्थल से बरामद बेल्ट को नियमानुसार सुरक्षित रखने के बजाय तत्कालीन जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने करीब दो दिन तक अपनी कार में रखा था। बाद में इसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। इतना ही नहीं, पोस्टमार्टम के दौरान भी बेल्ट को अस्पताल में जमा नहीं कराया गया था। इस लापरवाही को जांच में गंभीर माना जा रहा है और सीबीआई जल्द ही संबंधित पुलिस अधिकारी से पूछताछ कर सकती है।
हत्या की आशंका हुई मजबूत
ट्विशा के परिजनों ने शुरू से ही मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई थी। उनका कहना था कि यदि मामला आत्महत्या का था, तो फंदे में इस्तेमाल हुई बेल्ट को सुरक्षित क्यों नहीं रखा गया। बेल्ट के रखरखाव में कथित लापरवाही सामने आने के बाद मामले में संदेह और गहरा गया है।
आर्थिक और पेशेवर पहलुओं की भी जांच
सीबीआई जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि ट्विशा जिस कंपनी में कार्यरत थीं, वहां से उन्हें पिछले छह से सात महीनों से नियमित वेतन नहीं मिला था। एजेंसी अब यह भी जांच कर रही है कि क्या आर्थिक दबाव, नौकरी से जुड़ी परेशानियां या व्यक्तिगत विवाद उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहे थे।
फिलहाल अदालत में पेशी के बाद यह स्पष्ट होगा कि सीबीआई दोनों आरोपियों की रिमांड बढ़ाने की मांग करती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है। मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी कई पहलुओं पर साक्ष्य जुटा रही है।