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कच्चे तेल में उछाल और वैश्विक तनाव का असर, तीन महीने की सबसे बड़ी गिरावट के साथ धड़ाम हुए सेंसेक्स-निफ्टी


नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और निवेशकों की सतर्कता के चलते घरेलू बाजार में पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बिकवाली हावी रही। दिन के अंत में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके साथ ही पिछले कई कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला भी थम गया और निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी दर्ज की गई।

बाजार बंद होने पर बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी 2.15 प्रतिशत टूटकर 76,503.60 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 516.65 अंक यानी 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,882.05 अंक पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान दोनों सूचकांकों ने दिन का निचला स्तर भी छुआ और पिछले तीन महीनों की सबसे बड़ी दैनिक गिरावट दर्ज की।

गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी उल्लेखनीय कमजोरी के साथ बंद हुए। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि बिकवाली लगभग सभी वर्गों के शेयरों में फैली रही और निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाना उचित समझा।

सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो बैंकिंग, निजी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, एफएमसीजी, मीडिया, ऑटो, ऑयल एंड गैस तथा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक दबाव रहा। हालांकि फार्मा और मेटल क्षेत्र में भी गिरावट दर्ज हुई, लेकिन अन्य क्षेत्रों की तुलना में नुकसान अपेक्षाकृत कम रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौरान निवेशक रक्षात्मक क्षेत्रों की ओर झुकाव दिखाते हैं, जिससे कुछ सेक्टरों में गिरावट सीमित रही।

दिनभर की बिकवाली का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव माना गया। हालिया घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में हालात फिर से संवेदनशील हो गए हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों में छह प्रतिशत से अधिक की तेजी ने आयातक देशों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की महंगाई का असर महंगाई, व्यापार घाटे और कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है।

विदेशी घटनाक्रम का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखाई दिया। रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर बंद हुआ, जिससे आयात लागत बढ़ने की आशंका और मजबूत हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर टिकती हैं तो भारतीय बाजारों में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 23,780 से 23,750 अंक का दायरा महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर से नीचे टिकता है तो गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं 24,020 से 24,050 अंक का स्तर निकट अवधि में प्रमुख प्रतिरोध रहेगा। बाजार की अगली दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने और अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

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