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सिंगापुर में जुबिन गर्ग की मौत के मामले में पोत संचालकों पर उठे सवाल, समुद्र में डूबने से गई थी गायक की जान


नई दिल्ली। भारतीय गायक जुबिन गर्ग की डूबने की घटना ने नशे में धुत यात्रियों से निपटने के दौरान पोत संचालकों की जिम्मेदारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह बात स्ट्रेट्स टाइम्स की रिपोर्ट में वकीलों के हवाले से कही गई है।

रिपोर्ट में अन्य लोगों के साथ-साथ सिंगापुर की एक ला फर्म, ट्रायंगल लीगल के प्रबंध निदेशक निको ली का भी उल्लेख है, जिन्होंने सिंगापुर समुद्री और बंदरगाह प्राधिकरण (पोर्ट) के नियमों का हवाला दिया है। इसमें नशे में धुत यात्रियों को पोत पर चढ़ने से रोकने के प्रविधान हैं।

क्या नशे में थे गायक?
ली के अनुसार, पोत के मालिक, एजेंट या कप्तान को किसी भी ऐसे व्यक्ति को पोत पर चढ़ने की अनुमति नहीं देनी चाहिए, जो शराब या ड्रग्स के प्रभाव में हो और जिसका नशा पोत, चालक दल या किसी अन्य व्यक्ति की सुरक्षा को खतरे में डालता हो।

स्ट्रेट्स टाइम्स ने ली के हवाले से कहा, ”नागरिक दायित्व के संदर्भ में, यह तर्क दिया जा सकता है कि पोत का कप्तान लापरवाह है, क्योंकि सामान्य लापरवाही के सिद्धांतों के तहत पोत पर सवार मेहमानों के प्रति उसकी प्रथम दृष्ट्या देखभाल की जिम्मेदारी होती है।”

व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण की मांग
गर्ग के मामले का हवाला देते हुए ली ने कहा कि परिस्थितियां गंभीर थीं, क्योंकि पोत के नियंत्रक को पता था कि यात्री नशे में था। उन्होंने आगे कहा कि गायक ने सभी यात्रियों के लिए दी गई सुरक्षा संबंधी जानकारी को शायद समझा नहीं होगा।

पोत संचालक किसी चालक दल के सदस्य को सीधे उसकी निगरानी के लिए नियुक्त कर सकते थे या यह सुनिश्चित कर सकते थे कि जब वह समझने में सक्षम हो, तब उसे व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण दिया जाए।

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