ताजा आकलनों के अनुसार, भारत के पास करीब 172 और पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु वॉरहेड मौजूद हैं। हालांकि संख्या लगभग बराबर है, लेकिन क्षमता और संरचना के स्तर पर भारत को अधिक उन्नत माना जाता है।
भारत की परमाणु रणनीति “नो फर्स्ट यूज” यानी पहले इस्तेमाल न करने की नीति पर आधारित है। इसके साथ ही भारत ने जमीन, हवा और समुद्र—तीनों माध्यमों से परमाणु हथियार लॉन्च करने की क्षमता विकसित कर ली है, जिसे “न्यूक्लियर ट्रायड” कहा जाता है।
भारत के पास अग्नि सीरीज की मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज करीब 700 किलोमीटर (Agni-I) से लेकर 5000+ किलोमीटर (Agni-V) तक जाती है। इसके अलावा पृथ्वी-II जैसी शॉर्ट-रेंज मिसाइलें और राफेल, मिराज-2000H और जगुआर जैसे विमान भी परमाणु मिशन में सक्षम माने जाते हैं।
समुद्री क्षमता की बात करें तो भारत के पास INS Arihant और INS Arighat जैसी परमाणु पनडुब्बियां हैं, जो K-15 और K-4 जैसी सबमरीन लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलें दागने में सक्षम हैं। इससे भारत की “सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” मजबूत होती है।
वहीं पाकिस्तान की परमाणु नीति अधिक आक्रामक और अस्पष्ट मानी जाती है। उसने “फुल स्पेक्ट्रम डिटरेंस” की रणनीति अपनाई है, जिसका उद्देश्य भारत की पारंपरिक सैन्य बढ़त को न्यूक्लियर धमकी से संतुलित करना है।
पाकिस्तान के पास शाहीन-1 से शाहीन-3 तक बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज लगभग 750 किलोमीटर से 2750 किलोमीटर तक जाती है। इसके अलावा बाबर क्रूज मिसाइलें और कम दूरी की नस्र मिसाइल भी मौजूद है, जिसे टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन माना जाता है।
हवाई क्षमता के लिए पाकिस्तान के पास मिराज फाइटर जेट और JF-17 जैसे प्लेटफॉर्म हैं, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। हालांकि उसकी नौसैनिक परमाणु क्षमता अभी विकास के शुरुआती चरण में मानी जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका न्यूक्लियर ट्रायड, मजबूत सेकंड स्ट्राइक क्षमता और तेजी से विकसित होती मिसाइल टेक्नोलॉजी है। दूसरी ओर पाकिस्तान अपनी रणनीति में कम दूरी के सामरिक परमाणु हथियारों पर अधिक निर्भर करता है।
रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत की नीति स्थिर और स्पष्ट है, जबकि पाकिस्तान की परमाणु रणनीति अधिक जोखिमभरी और अनिश्चित मानी जाती है, जिससे क्षेत्रीय तनाव की संभावना बढ़ जाती है।
कुल मिलाकर, भले ही दोनों देशों की परमाणु ताकत संख्या में लगभग बराबर हो, लेकिन तकनीकी क्षमता, रणनीति और डिलीवरी सिस्टम के मामले में भारत को अधिक उन्नत स्थिति में माना जाता है।