रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच रूसी तेल आयात बढ़ाने की योजना पर काम शुरू किया है। पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है। ऐसे में सस्ता रूसी तेल इस्लामाबाद के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
दरअसल, पाकिस्तान ने पहली बार रूस से सस्ते तेल खरीदने की पहल तत्कालीन प्रधानमंत्री Imran Khan के कार्यकाल में की थी। इमरान खान की मॉस्को यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर बातचीत तेज हुई थी। इसके बाद अप्रैल 2023 में पाकिस्तान ने रूस को रियायती दरों पर कच्चे तेल का पहला आधिकारिक ऑर्डर दिया। जून 2023 में रूसी कच्चे तेल की पहली खेप कराची बंदरगाह पहुंची थी, जिसमें करीब 45 हजार मीट्रिक टन यूराल क्रूड शामिल था। खास बात यह रही कि पाकिस्तान ने इस तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर की बजाय चीनी युआन में किया था।
हालांकि बाद में पाकिस्तान ने रूसी तेल आयात धीमा कर दिया था। इसकी बड़ी वजह रूसी क्रूड का भारी होना और खाड़ी देशों की तुलना में ट्रांसपोर्ट लागत ज्यादा होना बताया गया। लेकिन अब वैश्विक ऊर्जा संकट और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान फिर से रूस की ओर झुकता दिखाई दे रहा है।
सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि रक्षा और सैन्य सहयोग में भी रूस और पाकिस्तान के संबंध मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य अभ्यास और सुरक्षा सहयोग पहले से जारी हैं। यही कारण है कि रूस-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों को भारत के लिए रणनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस पारंपरिक रूप से भारत का करीबी सहयोगी रहा है, लेकिन बदलती वैश्विक राजनीति में मॉस्को अब दक्षिण एशिया में अपने विकल्प भी मजबूत करना चाहता है। वहीं पाकिस्तान अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस के साथ रिश्ते गहरे करने में जुटा है।
हालांकि भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी अब भी बेहद मजबूत मानी जाती है, लेकिन पाकिस्तान और रूस के बढ़ते संपर्कों ने क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा जरूर तेज कर दी है।