मुंबई में बातचीत के दौरान हॉलस्ट्रॉम ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी यानी संसाधनों के पुनः उपयोग और टिकाऊ उत्पादन की अवधारणा आने वाले वर्षों में दुनिया की प्रमुख जरूरत बनने जा रही है। उनके अनुसार भारत और फिनलैंड दोनों ऐसे देश हैं जो पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की सीमित उपलब्धता जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बेहद आवश्यक है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर बोलते हुए उन्होंने इसे दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनका कहना था कि समझौते से जुड़ी बातचीत पूरी हो चुकी है और अब इसके क्रियान्वयन की प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि समझौता लागू होने के बाद भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेज वृद्धि होगी। विशेष रूप से फिनलैंड और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को इससे नई ऊर्जा मिलेगी और द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान स्तर से दोगुना तक पहुंच सकता है। इससे निवेश, तकनीक हस्तांतरण और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
महाराष्ट्र की आर्थिक भूमिका पर चर्चा करते हुए हॉलस्ट्रॉम ने कहा कि यह राज्य भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र है और देश के औद्योगिक तथा निवेश परिदृश्य में इसकी विशेष पहचान है। उन्होंने बताया कि फिनलैंड और महाराष्ट्र के बीच कई परियोजनाओं पर सहयोग जारी है। मुंबई के ससून डॉक के विकास से संबंधित परियोजना में फिनिश कंपनियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनका मानना है कि ऐसे संयुक्त प्रयास दोनों देशों के बीच व्यावसायिक संबंधों को और मजबूत बनाने में सहायक साबित होंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और फिनलैंड के विदेश व्यापार मंत्री विले टावियो के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार मुलाकात हो चुकी है। इन बैठकों में हरित अर्थव्यवस्था, सतत विकास और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा विज्ञान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी दोनों पक्ष नए अवसर तलाश रहे हैं। हाल ही में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया था, जिसे भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत और फिनलैंड के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले समय में व्यापार, तकनीक और हरित विकास के क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर सकता है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना है, जिससे निवेश और कारोबार का दायरा भी व्यापक होगा।