ओपन सोर्स इंटेलिजेंस विश्लेषक Damien Symon के मुताबिक, यह पोत समुद्री अनुसंधान के नाम पर इलाके का विस्तृत डेटा इकट्ठा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे डेटा का इस्तेमाल भविष्य में पनडुब्बी ऑपरेशन और सैन्य रणनीति में किया जा सकता है, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
Shi Yan 6 को आधिकारिक तौर पर एक वैज्ञानिक अनुसंधान पोत बताया जाता है, लेकिन भारत समेत कई देश इसे “ड्यूल-यूज” यानी शोध के साथ-साथ खुफिया जानकारी जुटाने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में देखते हैं। यह जहाज समुद्र की गहराई, तल की संरचना और जल प्रवाह जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने में सक्षम है।
यह गतिविधि ऐसे समय में सामने आई है जब भारत ग्रेट निकोबार द्वीप पर अपना महत्वाकांक्षी Great Nicobar Project तेजी से विकसित कर रहा है। करीब 75,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट और टाउनशिप जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं, जिसे हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।
बंगाल की खाड़ी भारत के लिए सिर्फ भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि आर्थिक और सैन्य दृष्टि से भी बेहद अहम है। यह क्षेत्र भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का मुख्य केंद्र है और दक्षिण-पूर्व एशिया से कनेक्टिविटी का अहम मार्ग भी। साथ ही, यह मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंच का प्रमुख रास्ता है, जहां से वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में उसकी बढ़ती मौजूदगी और प्रभाव को दर्शाती हैं। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह अपनी समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक परियोजनाओं की निगरानी और मजबूत करे।