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इजरायल अब युद्ध से इतर AI और सेमीकंडक्टर तकनीक बढ़ाने पर दे रहा जोर, जानें क्या है प्लान?


तेलअवीव।
इजरायल (Israel) अब मिडिल ईस्ट (Middle East.) के युद्ध मोर्चों पर पारंपरिक सैन्य रणनीति के बजाय बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), संचार प्रणालियों और अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीक (Cutting-edge Semiconductors Technology) पर निर्भर रहने की तैयारी कर रहा है। इजरायली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुलासा किया है कि आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय रणनीतिक श्रेष्ठता बंदरगाहों या रेलवे गलियारों पर नहीं, बल्कि उन्नत प्रौद्योगिकी पर आधारित होगी। अधिकारियों ने कहा है कि भविष्य के युद्ध मैदान पर सैनिकों के बजाय बड़ी टेक कंपनियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इजरायल मध्य पूर्व में विकसित हो रहे रणनीतिक आर्थिक गलियारों की ‘वास्तविक रीढ़’ के रूप में प्रौद्योगिकी और संचार अवसंरचना ( Communication Infrastructure ) को देख रहा है।


IMEC और I2U2 को नया नजरिया

वहीं, इस नई सोच के तहत इजराइल भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) और I2U2 समूह जैसी पहलों को पूरी तरह नए नजरिए से देख रहा है। इजरायली अधिकारी अमेरिकी चिप दिग्गज एनवीडिया समेत वैश्विक टेक कंपनियों के साथ बढ़ते सहयोग पर जोर दे रहे हैं। इजरायल खुद को भारत, खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों के बीच नवाचार और प्रौद्योगिकी का प्रवेश द्वार बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जहां ये कंपनियां अपने अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित कर रही हैं।


ईरान पर इजरायल की स्पष्ट रणनीति

ईरान के साथ चल रहे तनाव पर इजरायली अधिकारियों ने साफ किया कि इजरायल का लक्ष्य तेहरान में सत्ता परिवर्तन नहीं है। उनका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को ‘पीढ़ीगत रूप से कमजोर’ करना है। अधिकारियों ने बताया कि लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के विकास के लिए विशाल औद्योगिक आधार जरूरी होता है। इजरायल इसी आधार को निशाना बना रहा है ताकि ईरान इजरायल की हवाई सुरक्षा को भेद सकने वाली मिसाइलें विकसित न कर सके।

इसके अलावा ईरानी सैन्य नेतृत्व और प्रॉक्सी समूहों के कमांडरों को लक्ष्य बनाना भी ऑपरेशनल क्षमता को बाधित करने की रणनीति का हिस्सा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब नेतृत्व लगातार छिपने, जगह बदलने और नई कम्युनिकेशन लाइनें बनाने में लगा रहता है, तो उसकी परिचालन क्षमता तेजी से घट जाती है।


भारत से IRGC पर कार्रवाई की अपील

इजरायली पक्ष ने भारत से बड़े राजनयिक प्रयास के तहत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है। अधिकारियों ने कहा कि इजरायल इस मुद्दे को भारतीय अधिकारियों के समक्ष कई बार उठा चुका है और उम्मीद करता है कि भारत आधिकारिक तौर पर IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करे। उन्होंने बताया कि अब तक 44 देश IRGC के खिलाफ कार्रवाई कर चुके हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया के फैसले और यूरोपीय संघ की पहल का जिक्र किया।


हमास पर भी भारत से उम्मीद

7 अक्टूबर के हमले के बाद इजराइल ने भारत से हमास को भी आतंकवादी संगठन घोषित करने की अपील दोहराई है। भारत ने हमले की कड़ी निंदा की थी, लेकिन अब तक हमास को आतंकवादी संगठन के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। इसी दौरान ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची का हालिया नई दिल्ली दौरा इजरायली पक्ष की चिंता का विषय बना हुआ है, जहां उन्होंने भारत को ‘भरोसेमंद दोस्त’ बताया था।

दूसरी ओर इजरायली अधिकारी पूरे टकराव को क्षेत्रीय रणनीतिक और ऊर्जा प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देख रहे हैं। उनके अनुसार, ईरान की मिसाइल क्षमता को कम करने और उसके क्षेत्रीय सैन्य प्रभाव को सीमित करने के इजरायली लक्ष्य काफी हद तक हासिल हो चुके हैं।

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