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गगनयान मिशन के लिए इसरो पूरी तरह तैयार सफल इंजन परीक्षण के बाद जल्द होगी पहली मानव रहित उड़ान


नई दिल्ली । भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने स्पष्ट किया है कि देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन को पूरी तरह सुरक्षित और सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। इसरो के चेयरमैन डॉ वी नारायणन ने बताया कि मिशन से जुड़ी अधिकांश महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास पूरा हो चुका है और अब अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले तीन मानव रहित मिशनों का संचालन किया जाएगा। इनमें पहला मिशन जल्द लॉन्च किए जाने की तैयारी अंतिम चरण में है और इसकी तारीख भी जल्द घोषित की जाएगी।

डॉ वी नारायणन ने कहा कि गगनयान केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर मानव जीवन से जुड़े इस मिशन में जोखिम की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। इसलिए हर तकनीक और सुरक्षा प्रणाली को कई स्तरों पर परखा जा रहा है ताकि वास्तविक मिशन पूरी तरह सुरक्षित और सफल हो सके।

इसरो प्रमुख ने हाल ही में सफल रहे सेमी क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड परीक्षण को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षण के दौरान इंजन की लगभग अट्ठासी प्रतिशत क्षमता का सफल परीक्षण किया गया। यह उपलब्धि भविष्य में पूर्ण क्षमता वाले इंजन परीक्षण और भारी प्रक्षेपण यानों के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैज्ञानिक अब इंजन को उसकी पूरी क्षमता पर संचालित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

इसरो के अनुसार चौबीस जून को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में सेमी क्रायोजेनिक इंजन के पावर हेड टेस्ट का सफल हॉट टेस्ट किया गया। यह परीक्षण एक सौ पचहत्तर टन थ्रस्ट स्तर पर किया गया जो अब तक का सबसे बड़ा परीक्षण रहा। इससे पहले इंजन का परीक्षण कम क्षमता पर किया गया था लेकिन इस बार मिले परिणामों ने वैज्ञानिकों का आत्मविश्वास और बढ़ा दिया है।

परीक्षण के दौरान इंजन के सभी प्रमुख सिस्टम उम्मीद के अनुरूप कार्य करते रहे। मुख्य टर्बोपंप ने भी निर्धारित दबाव पर सफल प्रदर्शन किया जिससे यह साबित हुआ कि इंजन भविष्य के जटिल अंतरिक्ष अभियानों के लिए पूरी तरह सक्षम बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस सफलता के बाद अब दो सौ टन यानी पूर्ण क्षमता वाले इंजन परीक्षण की तैयारी शुरू कर दी गई है।

गगनयान मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। इस मिशन के सफल होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जिन्होंने अपने दम पर मानव को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता विकसित की है। इससे अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान रक्षा तकनीक और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को नई गति मिलेगी।

इसरो का मानना है कि गगनयान केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं बल्कि देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा। सफल इंजन परीक्षण और तेजी से आगे बढ़ती तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि भारत अब मानव अंतरिक्ष अभियान के अपने सबसे बड़े सपने को साकार करने के बेहद करीब पहुंच चुका है।

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