मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत, मध्य भारत, पूर्वी भारत और दक्षिण के कई हिस्सों में सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण वर्षा गतिविधियों में वृद्धि देखने को मिलेगी। निचले वायुमंडलीय स्तरों पर बने चक्रवाती परिसंचरण और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में विकसित मौसमीय परिस्थितियां इस बदलाव की प्रमुख वजह मानी जा रही हैं। इन प्रणालियों के प्रभाव से कई राज्यों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और आंधी की स्थिति बन सकती है।
पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तराखंड सहित अनेक राज्यों में वर्षा गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में तेज हवा के झोंके 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकते हैं। इसके चलते लोगों को खुले स्थानों, कमजोर संरचनाओं और बड़े पेड़ों के आसपास सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग ने विशेष रूप से किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। तेज हवाओं और भारी बारिश से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। खेतों में काम करने वाले लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने और बिजली गिरने की घटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी अपनाने को कहा गया है।
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी मौसम के बदलने के संकेत हैं। यहां हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आने और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में भी वर्षा और आंधी का प्रभाव देखने को मिल सकता है। पूर्वी भारत के राज्यों में बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर भी सतर्कता बरतने की आवश्यकता बताई गई है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियों के सक्रिय होने से कई जिलों में बारिश की संभावना है। पश्चिमी और उत्तरी राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ वर्षा दर्ज की जा सकती है। वहीं मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने का अनुमान है। इससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा सकती है।
पर्वतीय राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी मौसम सक्रिय रहने वाला है। इन क्षेत्रों में वर्षा के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी गई है, क्योंकि कुछ स्थानों पर भूस्खलन और सड़क बाधित होने जैसी स्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा गतिविधियों में यह वृद्धि मानसून के आगे बढ़ने का संकेत है। इससे देश के कई हिस्सों में लंबे समय से बनी गर्मी की स्थिति कमजोर पड़ सकती है। हालांकि जहां एक ओर बारिश राहत लेकर आएगी, वहीं दूसरी ओर तेज हवाएं, जलभराव और बिजली गिरने जैसी घटनाएं चुनौती भी बन सकती हैं। इसलिए नागरिकों को मौसम विभाग की सलाह का पालन करने और आवश्यक सतर्कता बरतने की अपील की गई है।