कैलाश खेर सुबह करीब 3 बजे मंदिर पहुंचे और नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती का दिव्य दृश्य देखा। आरती के दौरान वे पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए। लगभग दो घंटे तक उन्होंने आरती का अनुभव लिया और इसके बाद नंदी जी का पूजन-अभिषेक किया। उन्होंने नंदी के कान में अपनी मनोकामना भी व्यक्त की, जैसा कि परंपरा के अनुसार श्रद्धालु करते हैं।
इसके बाद उन्होंने चांदी द्वार के माध्यम से पुजारी के जरिए भगवान महाकाल को जल अर्पित किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। दर्शन के पश्चात मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से उनका सम्मान किया गया।
इस आध्यात्मिक अनुभव के बाद कैलाश खेर ने कहा कि महाकाल के दरबार में पहुंचना स्वयं में एक दिव्य अनुभूति है। उनके अनुसार, जो भी श्रद्धालु यहां आता है, वह आध्यात्मिक रूप से शुद्ध होता है और जन्मों के पापों से मुक्ति का अनुभव करता है। उन्होंने भस्म आरती को अत्यंत पवित्र और दुर्लभ दर्शन बताया और कहा कि यह केवल भगवान महाकाल की विशेष कृपा से ही संभव हो पाता है।
उन्होंने मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की और कहा कि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद दर्शन और सुरक्षा व्यवस्था बेहद सुव्यवस्थित तरीके से संचालित की जा रही है।
महाकाल मंदिर में हुई यह उपस्थिति एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि यह स्थान केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं और कलाकारों के लिए भी आध्यात्मिक आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।