33 वर्षीय श्रीकांत ने अपने से नौ साल छोटे प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ पूरे मुकाबले में जबरदस्त जुझारूपन दिखाया। एक घंटे नौ मिनट तक चले इस मुकाबले में उन्होंने शानदार वापसी भी की लेकिन निर्णायक गेम में थकान उन पर भारी पड़ गई। अंत में उन्हें 15 21 21 16 और 9 21 से हार स्वीकार करनी पड़ी।
यह मुकाबला शुरुआत से ही बेहद प्रतिस्पर्धी रहा। पहले गेम में सु ली यांग ने तेज शुरुआत करते हुए शुरुआती बढ़त बना ली। हालांकि श्रीकांत ने शानदार वापसी करते हुए स्कोर बराबर कर दिया लेकिन इसके बाद ताइवानी खिलाड़ी ने लगातार अंक जुटाकर पहला गेम अपने नाम कर लिया। पहले गेम में मिली हार के बावजूद भारतीय खिलाड़ी ने हिम्मत नहीं हारी और दूसरे गेम में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मुकाबले में वापसी की।
दूसरे गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली लेकिन मध्यांतर के बाद श्रीकांत ने लगातार अंक बटोरते हुए मजबूत बढ़त बना ली। उन्होंने आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए दूसरा गेम 21 16 से जीत लिया और मुकाबले को निर्णायक तीसरे गेम तक पहुंचा दिया। इस जीत के बाद भारतीय प्रशंसकों को उम्मीद थी कि श्रीकांत लंबे समय बाद किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब पर कब्जा जमा लेंगे।
हालांकि निर्णायक गेम में मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल गया। लगातार दो गेम तक चले संघर्ष का असर श्रीकांत की फिटनेस और गति पर साफ दिखाई दिया। दूसरी ओर सु ली यांग ने मौके का पूरा फायदा उठाया और लगातार अंक हासिल करते हुए मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण बना लिया। उन्होंने तीसरा गेम 21 9 से जीतकर अपने करियर का पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब अपने नाम कर लिया।
यह दोनों खिलाड़ियों के बीच तीसरी भिड़ंत थी। इससे पहले दोनों ने एक एक मुकाबला जीता था। हाल ही में थाईलैंड ओपन में भी सु ली यांग ने श्रीकांत को हराया था और यूएस ओपन फाइनल में भी उन्होंने अपनी बढ़त कायम रखी।
हार के बाद भी श्रीकांत ने सकारात्मक सोच दिखाई। उन्होंने कहा कि उनकी मेहनत सही दिशा में जा रही है और उन्हें अपने खेल पर भरोसा है। उनके अनुसार अब केवल महत्वपूर्ण मौकों पर अहम अंक जीतने की जरूरत है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी की तारीफ करते हुए कहा कि सु ली यांग पिछले कुछ महीनों से शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और फाइनल में भी उन्होंने दबाव वाले पलों का बेहतर इस्तेमाल किया।
वहीं खिताब जीतने के बाद सु ली यांग अपनी खुशी छिपा नहीं सके। उन्होंने कहा कि उन्हें अभी भी विश्वास नहीं हो रहा कि उन्होंने अपना पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीत लिया है। उन्होंने बताया कि अंतिम गेम में दोनों खिलाड़ी थक चुके थे लेकिन उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और लगातार लड़ते रहने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के लिए उन्होंने लंबे समय तक मेहनत की है और भविष्य में भी कई बड़े खिताब जीतने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेंगे।
भले ही श्रीकांत इस बार ट्रॉफी जीतने से चूक गए हों लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन यह संकेत देता है कि वह एक बार फिर शीर्ष स्तर पर वापसी की राह पर हैं। आने वाले टूर्नामेंटों में भारतीय प्रशंसकों को उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।