डायबिटीज की स्थिति में शरीर के भीतर बढ़ी हुई शुगर का स्तर धीरे-धीरे रक्त वाहिकाओं और धमनियों को नुकसान पहुँचाने लगता है, जिससे मरीजों में दिल की बीमारियों का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक बढ़ जाता है। टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में इंसुलिन लेने के बावजूद कई बार नसों की मजबूती और लचीलापन कम होने लगता है। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने एक विशेष अध्ययन किया, जिसके प्रारंभिक नतीजे बेहद सकारात्मक रहे हैं। इस शोध के दौरान यह देखा गया कि करक्यूमिन का नियमित और नियंत्रित सेवन रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है और उन्हें डायबिटीज के दुष्प्रभावों से बचा सकता है।
प्रयोगशाला में किए गए इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने ‘हीट शॉक प्रोटीन 70’ नामक एक विशेष प्रोटीन की भूमिका का भी विश्लेषण किया। यह प्रोटीन कोशिकाओं को बाहरी तनाव और नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अध्ययन में पाया गया कि करक्यूमिन के प्रभाव से इस प्रोटीन का संतुलन बेहतर होता है, जिससे शरीर की कोशिकाएं तनाव को झेलने में अधिक सक्षम हो जाती हैं। इसके साथ ही, दिल से शरीर के अन्य अंगों तक शुद्ध खून ले जाने वाली मुख्य धमनी, जिसे महाधमनी कहा जाता है, उसकी स्थिति में भी करक्यूमिन के सेवन के बाद सुधार दर्ज किया गया। यह संकेत देता है कि हल्दी का यह तत्व न केवल नसों को सुरक्षा देता है बल्कि हृदय प्रणाली की कार्यक्षमता को भी बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
हालांकि, इन नतीजों के बावजूद विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह महत्वपूर्ण है कि वर्तमान शोध अभी शुरुआती चरणों में है और इसके अधिकांश प्रयोग जानवरों पर किए गए हैं। मानव शरीर पर इसके सटीक प्रभाव और आवश्यक मात्रा को निर्धारित करने के लिए अभी और बड़े स्तर पर नैदानिक परीक्षणों की आवश्यकता है। केवल भोजन में हल्दी की मात्रा बढ़ा देने या बाजार में मिलने वाले सप्लीमेंट का उपयोग करने से समान लाभ मिलेगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। भविष्य में होने वाले शोध ही यह तय करेंगे कि करक्यूमिन को डायबिटीज के उपचार में एक सहयोगी विकल्प के रूप में कैसे शामिल किया जा सकता है। फिलहाल, विशेषज्ञों का मानना है कि एक अनुशासित जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह के साथ संतुलित खानपान ही स्वास्थ्य की सबसे बड़ी कुंजी है।