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ब्रज को बनाओ पूरी तरह सात्विक, प्रेमानंद महाराज की योगी सरकार से बड़ी मांग; मांस-मदिरा बैन पर फिर छिड़ी बहस



नई दिल्ली। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने एक बार फिर ब्रज क्षेत्र को मांस और मदिरा मुक्त बनाने की मांग उठाकर धार्मिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की उत्तर प्रदेश सरकार से अपील करते हुए कहा कि मथुरा, वृंदावन और पूरे ब्रज मंडल की पवित्रता बनाए रखने के लिए यहां मांस और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

अपने दैनिक सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ब्रज केवल एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की लीलाभूमि है। उन्होंने कहा कि जिस धरती पर भगवान कृष्ण ने बाल लीलाएं कीं और प्रेम, भक्ति व करुणा का संदेश दिया, वहां मांस और मदिरा की बिक्री उचित नहीं मानी जा सकती। महाराज ने कहा कि ब्रज की पहचान उसकी आध्यात्मिकता और सात्विक संस्कृति से है, इसलिए इसकी गरिमा को बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि हर साल लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से मथुरा, वृंदावन, बरसाना और गोवर्धन जैसे पवित्र स्थलों पर दर्शन और भक्ति के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ब्रज क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह धार्मिक और शांतिपूर्ण होना चाहिए। प्रेमानंद महाराज का मानना है कि यदि पूरे ब्रज क्षेत्र को मांस और मदिरा मुक्त घोषित किया जाता है, तो इससे यहां की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी।

गौरतलब है कि इससे पहले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी ब्रज क्षेत्र में शराब और मांस बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने दिल्ली से मथुरा तक पदयात्रा निकालते हुए कहा था कि धार्मिक नगरी में शराब की दुकानों की मौजूदगी श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।

हालांकि, इस मुद्दे पर पहले विवाद भी हो चुके हैं। कुछ समय पहले मथुरा में कुछ युवकों ने कथित तौर पर जबरन शराब की दुकान बंद कराने की कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया था। प्रशासन ने साफ किया था कि कानून हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

अब प्रेमानंद महाराज के ताजा बयान के बाद ब्रज क्षेत्र में मांस-मदिरा प्रतिबंध की मांग फिर सुर्खियों में आ गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय दे रहे हैं। कुछ लोग इसे ब्रज की धार्मिक पहचान से जोड़कर समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इस विषय पर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर संतुलित फैसला लिया जाना चाहिए।

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