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ट्रैफिक और पुलिस पर वीडियो बनाना पड़ा महंगा, मोरक्को में विदेशी कंटेंट क्रिएटर को अदालत ने सुनाई एक साल की सजा

नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो को लेकर मोरक्को में एक विदेशी कंटेंट क्रिएटर को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। फ्रेंच-अल्जीरियाई इन्फ्लुएंसर यास नौबेले को स्थानीय अदालत ने एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। मामला उस वीडियो से जुड़ा है जिसमें उन्होंने मोरक्को की ट्रैफिक व्यवस्था, स्थानीय नागरिकों की ड्राइविंग शैली और पुलिस व्यवस्था पर सार्वजनिक टिप्पणियां की थीं। अदालत ने इन टिप्पणियों को सरकारी संस्थाओं की कथित मानहानि और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला माना।

जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय यास नौबेले निजी यात्रा पर मोरक्को के ऐतिहासिक शहर माराकेश पहुंची थीं। इसी दौरान उन्होंने टैक्सी में यात्रा करते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर दिया। वीडियो में उन्होंने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, वाहन चालकों के व्यवहार और यातायात नियमों के पालन को लेकर कई आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं, जो बाद में व्यापक चर्चा का विषय बन गईं।

वीडियो में उन्होंने स्थानीय ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि बिना उचित कारण लोगों को रोका जाता है। इसके अलावा उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी लगाए और मोरक्को की व्यवस्थाओं की तुलना दूसरे देशों से करते हुए उन्हें कमजोर बताया। सोशल मीडिया पर वीडियो के तेजी से वायरल होने के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों ने इसकी जांच शुरू कर दी।

प्रशासन के अनुसार, जांच में वीडियो की सामग्री का परीक्षण किया गया और इसे सरकारी संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला माना गया। इसके बाद इन्फ्लुएंसर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। बताया गया कि यात्रा पूरी होने के बाद जब वह फ्रांस लौटने के लिए एयरपोर्ट पहुंचीं, तब सीमा अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने संबंधित वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया था, लेकिन तब तक जांच प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने वीडियो, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा की। न्यायालय ने उन्हें मोरक्को के नागरिकों और पुलिस बल के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी करने का दोषी मानते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इसके साथ आर्थिक दंड भी लगाया। हालांकि फैसले के बाद उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च अदालत में अपील करने का कानूनी अधिकार भी प्रदान किया गया है।

यह मामला एक बार फिर इस तथ्य को सामने लाता है कि अलग-अलग देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानहानि और सरकारी संस्थाओं पर सार्वजनिक टिप्पणी से जुड़े कानून अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी विदेशी नागरिक या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर के लिए यह आवश्यक है कि वह जिस देश की यात्रा कर रहा हो, वहां के स्थानीय कानूनों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी रखे तथा उनका पालन करे। इंटरनेट पर साझा की गई सामग्री कई बार सीमाओं से परे भी कानूनी परिणाम उत्पन्न कर सकती है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच यह घटना सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है। अधिक लोकप्रियता या व्यापक पहुंच हासिल करने की प्रतिस्पर्धा में प्रकाशित सामग्री यदि स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करती है या किसी देश की संस्थाओं को लेकर कानूनी विवाद खड़ा करती है, तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इसलिए ऑनलाइन सामग्री साझा करते समय तथ्यात्मकता, जिम्मेदारी और स्थानीय नियमों का पालन करना पहले से कहीं अधिक आवश्यक माना जा रहा है।

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