सुबह से मौसम खराब था और रुक-रुक कर बारिश हो रही थी, लेकिन इसका असर बच्चों के उत्साह पर बिल्कुल भी नहीं पड़ा। बारिश की फुहारों और शिप्रा नदी के प्रवाह के बीच बच्चों ने जिस आत्मविश्वास और संतुलन का परिचय दिया, वह देखने लायक था। नन्हें तैराकों ने पानी में योगासन करते हुए यह साबित कर दिया कि योग केवल जमीन पर ही नहीं, बल्कि जल में भी उतनी ही प्रभावशाली तरीके से किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अनुलोम-विलोम, ब्रीदिंग एक्सरसाइज, विभिन्न योग मुद्राओं और योग पिरामिड का प्रदर्शन किया। पानी में संतुलन बनाते हुए तैयार की गई आकर्षक आकृतियां दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। नदी की लहरों पर योगाभ्यास करते बच्चों की प्रस्तुति ने वहां मौजूद लोगों को रोमांचित कर दिया और सभी ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
मां शिप्रा तैराक दल के सचिव एवं प्रशिक्षक संतोष सोलंकी ने बताया कि उनकी संस्था पिछले कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जल योग का आयोजन करती आ रही है। हर वर्ष संस्था का प्रयास रहता है कि योग दिवस पर कुछ नया और प्रेरणादायक संदेश दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस बार बच्चों ने प्रतिकूल मौसम के बावजूद जिस समर्पण और अनुशासन का प्रदर्शन किया, वह सराहनीय है।
महिला प्रशिक्षक सपना माली के मार्गदर्शन में वैष्णवी बारोड, खुशी कहार, भारती कहार, राघव बारोड, युग बारोड, भोला कहार, याग्निक धकिते, वेदांश कोठार, अविनाश शर्मा और मुस्कान कहार सहित कई बच्चों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने अपने कौशल और संतुलन का शानदार प्रदर्शन कर यह संदेश दिया कि नियमित योग और तैराकी से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
शिप्रा नदी में आयोजित यह जल योग कार्यक्रम केवल एक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि स्वास्थ्य, अनुशासन, सकारात्मक सोच और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश भी था। बारिश के बीच नन्हें बच्चों का यह उत्साह लोगों के लिए प्रेरणा बन गया। कार्यक्रम ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की भावना को और अधिक मजबूत करते हुए समाज को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।